रामनगर 15अप्रैल (वार्ता) उत्तराखंड में रामनगर के तराई पश्चिमी क्षेत्र में बाघों पर संकट मंडरा जा रहा है। बीते कुछ दिनों में जहां एक बाघ की मौत हो चुकी है, जबकि आज एक और बाघिन को बचाया गया, जिससे तराई पश्चिमी वन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
रामनगर के तराई पश्चिमी के बैलपड़ाव रेंज के गैबुआ क्षेत्र में आज वन विभाग की गश्ती टीम को एक बाघिन बीमार अवस्था में दिखाई दी। सूचना मिलते ही उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया, जिसके बाद डॉ. साकेत बडोला के निर्देशन में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की टीम मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले एक नर बाघ को आपसी संघर्ष में घायल होने के बाद उसे बचाया गया था, , जबकि चार दिन पहले एक बाघ की मौत भी हो चुकी है।
बीमार बाघिन को ढेला रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, जहां वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्साधिकारी डॉ. दुश्यंत शर्मा ने उसकी जांच की।
डॉ. बडोला ने बताया कि आज एक मादा बाघिन घायल अवस्था में मिली थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर सफल रेस्क्यू किया। फिलहाल उसका इलाज किया जा रहा है।" वहीं, वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्साधिकारी डॉ. दुश्यंत शर्मा ने बताया कि बाघिन के शरीर का तापमान करीब 108 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो हीट स्ट्रोक की गंभीर स्थिति है। वह काफी ज्यादा निर्जलीकरण का भी शिकार थी। फिलहाल ग्लूकोज, ड्रिप और अन्य दवाइयों से उपचार किया जा रहा है और उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, खून की जांच समेत अन्य जांचों के जरिए उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
वन विभाग की टीम को उम्मीद है कि इलाज के बाद बाघिन जल्द स्वस्थ होगी और उसे फिर से जंगल में सुरक्षित छोड़ा जाएगा। हालांकि लगातार हो रही घटनाओं ने तराई पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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