रामनगर , फरवरी 13 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर के किसान जगदीप सिंह और उनकी पत्नी काजल ने ऑस्ट्रेलिया की सुख-सुविधा छोड़कर भारत में खेती करने का मन बनाकर एप्पल बेर की खेती में कामयाबी हासिल की है। किसान दम्पत्ति के पारंपरिक खेती से हटकर किए गए इस अनूठे प्रयोग से दोनों न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गए हैं।

किसान जगदीप का परिवार उसे ऑस्ट्रेलिया में बसने का दवाब बना रहे थे लेकिन उसने भारत में ही रहकर एप्पल बेर की खेती करने का फैसला किया, जिससे उसे अच्छा मुनाफा भी मिले और आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम हो। आज यह दम्पति एप्पल बेर की खेती से सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।

करीब पांच वर्ष पूर्व उन्होंने एप्पल बेर की खेती शुरू करने का निर्णय लिया, यह फसल आमतौर पर गुजरात, राजस्थान और बिहार जैसे गर्म इलाकों में होती है। उन्होंने पंतनगर, रुद्रपुर से एप्पल बेर के पौधे मंगवाए और अपनी दो एकड़ भूमि पर करीब 250 पौधे लगाए। शुरुआत में यह एक प्रयोग था लेकिन मेहनत, लगन और सही देखभाल ने इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया। जगदीप ने अपनी जमीन पर कश्मीरी बेर, कश्मीरी रेड बेर, ग्रीन एप्पल बेर और एप्पल बेर की चार प्रमुख किस्में लगाई हैं। खास बात यह है कि उन्होंने रासायनिक उर्वरकों से दूरी बनाकर ऑर्गेनिक खेती पर जोर दिया। जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से पौधों की देखभाल की गई, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर बनी रही।

इस वर्ष उन्हें 50 से 70 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर ही लोग उनके घर से एप्पल बेर खरीदने पहुंच रहे हैं। बाजार में एप्पल बेर की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। जगदीप ने बताया कि उनकी उपज की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी सप्लाई की जा रही है।

जगदीप की पत्नी काजल चीमा ने कहा कि खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर किसान नई तकनीक और नई फसलों को अपनाएं तो पारंपरिक खेती से भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

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