जालंधर , फरवरी 03 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं भोलाथ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी निंदा की, जिन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात को लेकर राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह को निशाना बनाने और अपमानित करने के लिए अपमानजनक और घटिया भाषा का इस्तेमाल किया।
श्री खैरा ने कहा कि यह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' है कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने सिर्फ एक सामाजिक मुलाकात के कारण एक सम्मानित आध्यात्मिक नेता को राजनीतिक कीचड़ में घसीटा। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और धार्मिक नेता अक्सर जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मिलते हैं, और ऐसी मुलाकातों का राजनीतिकरण करना मुख्यमंत्री के पद की गरिमा पर बुरा असर डालता है।
श्री मजीठिया के खिलाफ मामले का जिक्र करते हुए श्री खैरा ने बताया कि पंजाब सरकार और उसके विजिलेंस ब्यूरो ने अब तक गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय इस मामले में जमानत मंजूर कर ली है, जिससे यह सवाल उठता है कि इस मामले को राजनीतिक रूप से किस तरह पेश किया गया।
उन्होंने कहा कि बिक्रम मजीठिया के खिलाफ कथित झूठे मामले के बारे में बाबा गुरिंदर सिंह जी के व्यक्त किये गये विचार अब पूरे पंजाब में गूंज रहे हैं, और लोगों में यह धारणा बढ़ रही है कि आम आदमी पार्टी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों में फंसाने के लिए राज्य की पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी भावनाएं मौजूदा सरकार के तहत कानून प्रवर्तन के कामकाज के प्रति लोगों में बढ़ते गहरे अविश्वास को दर्शाती हैं।
श्री खैरा ने कहा, " बाबा गुरिंदर सिंह को निशाना बनाना और घटिया टिप्पणियों के जरिए उनकी ईमानदारी या इरादों पर सवाल उठाना लाखों अनुयायियों की भावनाओं पर हमला है, जो उनका बहुत सम्मान करते हैं। राजनीतिक मतभेद आध्यात्मिक हस्तियों के प्रति अनादर को सही नहीं ठहरा सकते।" जवाबदेही की मांग करते हुए, श्री खैरा ने श्री मान से पक्षपातपूर्ण राजनीति से ऊपर उठने और अपने संवैधानिक पद की गरिमा बनाये रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, " मैं मांग करता हूं कि भगवंत मान अपने गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणियों के लिए बाबा गुरिंदर सिंह जी और राधा स्वामी संगतसे तुरंत सार्वजनिक माफी मांगें।"उन्होंने कहा कि पंजाब को कानून-व्यवस्था और विकास पर ध्यान देने वाली ज़िम्मेदार सरकार की ज़रूरत है, न कि निजी हमलों और राजनीतिक ड्रामे की।
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