पुणे , मार्च 17 -- प्रख्यात साहित्यकार चंद्रकांत शहासने ने कहा है कि कविता साहित्य का मूल स्रोत है और यह सामाजिक परिवर्तन लाने का शक्तिशाली माध्यम बन सकती है।

यहां आयोजित दूसरे राज्य स्तरीय 'काव्यविश्व साहित्य सम्मेलन 2026' के उद्घाटन के अवसर पर सम्मेलन अध्यक्ष शहासने ने कविता को साहित्य की जननी बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहित्य को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने के लिए समय की कद्र करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कविता भावनाओं, विचारों, अनुभवों और कल्पना को व्यक्त करती है। यही कारण है कि यह साहित्य का गतिशील और प्रभावशाली रूप है, जो समाज को गढ़ने की क्षमता रखता है। इस कार्यक्रम में डॉ संजय जगताप, प्रमोदकुमार बेलसरे, चंद्रलेखा बेलसरे और वरिष्ठ लेखक श्याम भुरके जैसी कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। इनके अलावा अपेक्षा मैगजीन के संस्थापक-संपादक दत्तात्रय उभे और काव्यमित्र संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष राजेंद्र सागर भी उपस्थित थे।इस अवसर पर एक 'स्मारिका' और अपेक्षा पत्रिका का 'महिला दिवस विशेषांक' का विमोचन किया गया।

इस दौरान विशिष्ट योगदान देने वालों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, साहित्य गौरव पुरस्कार और विशेष आभार सम्मान से नवाजा गया। सम्मेलन में आमंत्रित कवियों का काव्य पाठ, हास्य कवि सम्मेलन और मराठी कविता में संत साहित्य के महत्व पर परिचर्चा आयोजित की गयीं।

श्री शहसाने ने कविताओं को दिव्य संदेशवाहक बताया जो सामूहिक सामाजिक चेतना को दर्शाती हैं। उन्होंने लोरी, पोवाड़ा और भूपाली जैसे पारंपरिक रूपों को काव्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताया।

श्री प्रमोद कुमार बेलसरे ने कहा कि कविता और लेखन सामाजिक मुद्दों की आलोचना करने के उपकरण हैं। वहीं श्याम भुरके ने बताया कि सातवाहन काल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि किसान मराठी में रचना करते और गाते थे, जिससे इस भाषा को शास्त्रीय पहचान मिली।

सुश्री चंद्रलेखा बेलसरे ने इस बात पर जोर दिया कि कविता लेखक के अभ्यास और भावनात्मक गहराई से निकलती है, जो घटनाओं और समकालीन सच्चाइयों को दर्शाती है।

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