अलवर , दिसम्बर 13 -- राजस्थान के कृषि मंत्री और अलवर जिला प्रभारी डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने कहा है कि वह राज्य सरकार के दो वर्ष के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं।
डाॅ मीणा ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान की सरकार सभी वर्गों के लिए अच्छा काम कर रही है। हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहे किसान आंदोलन पर उन्होंने कहा कि यह करार वर्ष 2022 में कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था। यह एशिया की सबसे बड़ी परियोजना है जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे और रोजगार भी उपलब्ध होगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगेगा।
डाॅ मीणा ने विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाया कि किसानों को आंदोलन के लिए उकसाया गया, उन्हें भड़काया गया, क्योंकि किसान अपनी जगह सही हो सकते हैं। उनको सही तथ्यों की जानकारी नहीं दी गयी। पिछली सरकार को किसानों को इस कंपनी को लेकर सभी जानकारी को बताया जाना चाहिए। किसानों को अंदेशा है कि यहां का गंदा पानी निकलेगा खेती खराब करेगा। प्रदूषण बढ़ेगा यह जो शंकाएं किसानों की हैं उन्हें दूर सरकार को करना और किसानों को समझाया जाएगा। अगर कहीं भी कोई चीज कमी है तो उसमें सुधार भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह चार बार हनुमानगढ़ गये थे, किसानों ने इस संबंध में उनसे बात भी नहीं की। उन्होंने बताया कि हर समस्या का हल संवाद से निकलता है और वहां के प्रतिनिधि जयपुर आकर मिलें और रास्ता जरूर निकलेगा। मुख्यमंत्री से सलाह के लिये समय लेकर उनसे बात करेंगे और अगर प्रतिनिधिमंडल वहां से नहीं आता है तो सरकार के नुमाइंदे वहां जाकर बात करेंगे। डाॅ मीणा ने कहा कि उन्हें सब पता है की कौन माहौल बिगड़ रहा है। इसमें कौन-कौन से तत्व इसमें शामिल हैं।
विधायक और सांसद के खिलाफ मुकदमे के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके ऊपर भी जनहित से संबंधित 138 मामले चल रहे हैं। सरिस्का को लेकर दो मामले दर्ज हुए थे। सरिस्का बचाने को लेकर उन्होंने आंदोलन किया था। सवाई माधोपुर में बजरी के खिलाफ भी आंदोलन हुआ था, जिसमें भी उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि जनहित के मामलों में उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं और सरकार इन मामलों को लेकर क्या करेगी क्या नहीं करेगी वह तो सरकार ही बताएगी।
किसानों को खाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों को खाद मिल रही है और उस पर पूरी तरह निगरानी कर रही है। चाहे निजी दुकानदार खाद बेच रहा है या सहकारी समिति द्वारा खाद बेचा जा रहा है। सब पर निगरानी है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि गड़बड़ी जरूर है, क्योंकि कुछ लोग इसका स्टॉक करके राज्य से दूसरे राज्य में बेच रहे हैं। अब तो सबसे बड़ी बात है कि किसानों ने भी जमा किया है। यह समझ से परे है कि किसानों ने क्यों जमा किया है। हो सकता है कि उनके दिमाग में यह बात हो कि आगे कभी खाद न मिले।
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