नयी दिल्ली , मार्च 16 -- राज्य सभा में विपक्ष ने वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की ओर से प्रस्तुत 2.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक की दूसरी अनुदान मांगों को बहुत भारी भरकम बताते हुए सोमवार को सवाल उठाया कि बजट का पैसा क्या सही मदों में जा रहा है? विपक्षी सदस्यों ने गैर-भाजपा सरकारों वाले राज्यों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन में भेदभाव की भी शिकायत की।

सत्तापक्ष के सदस्यों ने समेकित कोष से इन अनुदान को दुनिया के कुछ क्षेत्रों में युद्ध और अलग तरह के बढ़ते संकट के वर्तमान संकट के समय देश के गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों के आर्थिक हितों की रक्षा तथा विकास की गति को बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन अनुदान मांगों के इस बैच से संबंधित विनियोग विधेयक 2026 को आज भोजनावकाश के बाद चर्चा के लिए प्रस्तुत किया। उन्होंने इसे लोक सभा में पारित इसके रूप में सदन से स्वीकृति का प्रस्ताव रखा।

वित्त मंत्री ने प्रस्ताव रखते समय इस पर कोई वक्तव्य नहीं दिया।

प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए करते हुए कांग्रेस पार्टी के शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि सरकार पूरक मांगों जब इतना बड़ा प्रस्ताव लेकर आती है तो सवाल उठता है कि बजट का पैसा सही जगह जा रहा है या नहीं। उन्होंने अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच में आर्थिक स्थिरीकरण कोष के लिए मांगी गयी 57 हजार करोड़ रुपये की राशि की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया को लेकर जो राजनीति की है उसका परिणाम देश के लोगों को रसोई गैस आदि के संकट के रूप में झेलना पड़ रहा है।

श्री गोहिल ने कहा ,'' इतनी बड़ी राशि ऐसी स्थिति के लिए है जो मानव द्वारा पैदा किया गया संकट है।" कांग्रेस सदस्य ने कहा कि हार्मूज जलडमरू मार्ग हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इस पर ईरान का नियंत्रण है जिसके साथ हमारा अच्छा व्यवहार था।" उन्होंने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की हाल की इजराइल यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां बढ़ते तनाव के समय भारत को (इजराइल जा कर) 'मां की भूमि, बापू की भूमि' करने की जरूरत नहीं थी ।

श्री गोहिल ने कहा कि सरकार की विदेश नीति का परिणाम देश के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता गैस आपूर्ति की है। उन्होंने कहा कि सरकार के यह कहने से गैस का संकट दूर नहीं हो जाता कि देश में एलपीजी की कमी नहीं है। देश में जगह जगह गैस के लिए लोगों की कतारें लगी हुई हैं। ऊर्वरकों का आयात बढ़ता जा रहा है। कृषि समितियों को नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है जबकि किसान इसके उपयोग के परिणामों से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस रक्षा के लिए अनुपूरक अनुदान का समर्थन करती है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान की ओर से उठा रही चुनौतियों को देखते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास पर बजट खर्च बढ़ाने का सुझाव देते हुए कहा कि रक्षा विभाग की अनुपूरक मांगें राजस्व खर्च के लिए हैं।

श्री गोहिल ने स्पेक्ट्रम के लिए इस बैच में 35,200 करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल को कोरिया और जापान से अच्छी प्रौद्योगिकी हासिल करने से रोका गया है। उसे पैर में इस तरह की जंजीरें बांध कर निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए कहा जाता है। उन्होंने जल जीवन मिशन परियोजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री से इस पर ध्यान देने की अपील की।

द्रमुक के सदस्य पी. विल्सन ने सरकार पर भेदभावपूर्ण वित्तीय प्रबंधन का तरीका अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्य को सबके लिए शिक्षा, जल जीवन मिशन तथा मनरेगा जैसी योजनाओं का केंद्र के हिस्से के बकाये का भुगतान रोक दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा रोजगार और निर्यात की दृष्टि से कपड़ा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पर समुचित ध्यान नहीं दिये जाने से तमिलनाडु के तिरुपूर की कपड़ा इकाइयों का निर्यात 35 प्रतिशत घट गया है , बहुत सी इकाइयां बंद हो गयी हैं और दो लाख नौकरियां खत्म हो गयी हैं।

बीजेडी के मुजीबुल खान ने ओडिशा के लिए विशेष पैकेज की मांग करते हुए कहा कि राज्य को अक्सर प्राकृतिक आपदाओं से जूझना पड़ता है। उन्होंने खनिजों पर रायल्टी बढ़ाने की पुरानी लंबित मांग को भी पूरा करने की वित्त मंत्री से अपील की।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण सिंह ने कहा कि अनुपूरक अनुदान मांगों के इस बैच में 130 अधिक मांगे है जिनमें 61 प्रभावी मांगे हैं। उन्होंने कहा कि ये अनुदान मांगे उर्वरक सब्सिडी , गरीबों के लिए मुफ्त अनाज, वर्तमान वैश्विक वातावरण कीमत स्थिरता के लिए अतिरिक्त धन, सैनिकों और पूर्व सैनिकों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए और विकास की रफ्तार बनाये रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों और कार्यों के लिए हैं। उन्होंने कहा कि अनुदान मांगों की दूसरी किस्त कुल बजट के केवल 4 प्रतिशत के बराबर है और इससे राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए 19,200 करोड़ रुपये से कुछ अधिक के अनुदान की मांग की है। मोदी सरकार ने 2014 से पहले उर्वरक की कमी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नीम कोटेड यूरिया और नैनो यूरिया की शुरुआत की । उन्होंने नैनो यूरिया के बारे में कांग्रेस के श्री गोहिल के वक्तव्य को खारिज करते हुए कहा कि संसद की स्थायी समिति में कांग्रेस के सदस्यों तक ने नैनो यूरिया के प्रयोग से लागत कम होने, परिणाम अच्छे मिलने और अवांच्छित प्रभाव नहीं होने की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कांग्रेस के समय के छह बंद यूरिया काराखानों को चालू करने का कदम उठाया जिससे रामगुंडम, सिंदरी और गोरखपुर का कारखाना चालू हो चुका है। बाकी कारखाने भी चालू होने की राह पर हैं। उन्होंने कहा आज भारत की 70 प्रतिशत यूरिया की खपत देश से ही पूरी हो रही है और एक दिन यह 100 प्रतिशत आपूर्ति अपने स्रोत से होने लगेगी।

श्री सिंह ने कहा कि कोविड के समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूरिया के भाव 2400 रुपये और डीएपी 4000 रुपये (प्रति 50 किलो) तक पहुंच गये थे पर सरकार ने उन्हें इन ऊर्वरकों को क्रमश: 266 रुपये और 1350 रुपये बोरी पर मुहैया कराते रहने की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा है कि किसान अनाज का उत्पादन बढा रहा है।

उन्होंने खाद्य सब्सिडी के लिए 23600 करोड़ रुपये की मांग को गरीबों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बताया और कहा कि मार्च 2020 से लागू इस योजना पर हर साल दो लाख करोड़ रूपये खर्च कर लोगों के कल्याण को सुनिश्चित किया गया है। भाजपा सदस्य ने यह भी कहा कि सरकार ने इस योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है तथा किसानों को उनकी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा का उनका भी लाभ सुनिश्चित किया है।

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