नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- राज्यसभा ने बजट सत्र के पहले दिन बुधवार को बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और अपने पूर्व सदस्यों एल. गणेशन तथा सुरेश कलमाड़ी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

इससे पहले राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दोनों सदनों की बैठक में दिये अभिभाषण की अंग्रेजी और हिन्दी में प्रति सदन के पटल पर रखी।

सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सदस्यों को सुश्री जिया, श्री गणेशन और श्री कलमाड़ी के निधन की जानकारी दी।

उन्होंने दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बेगम खालिदा ज़िया का पिछले वर्ष 30 दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बंगलादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रही सुश्री जिया 1991 से 2006 के बीच तीन कार्यकालों तक इस पद पर रही। वह 1996 से 2001 तक नेता प्रतिपक्ष भी रहीं। उन्होंने कहा कि बेगम खालिदा ज़िया ने बांग्लादेश के विकास तथा भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सभापति ने कहा , " यह सदन शोक संतप्त परिवार, बांग्लादेश की सरकार और वहां की जनता के साथ महामहिम बेगम खालिदा ज़िया के निधन पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करता है।"सभापति ने कहा कि श्री गणेशन का 91 वर्ष की आयु में गत 4 जनवरी को निधन हो गया। श्री गणेशन ने जून 1980 से अप्रैल 1986 तक राज्यसभा में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल 1934 को तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले के कन्ननथंगुडी कीलैयूर में जन्मे श्री गणेशन द्रविड़ विचारधारा के प्रवर्तक और प्रतिष्ठित जननेता थे। वह तमिल भाषाई आंदोलन से प्रेरित होकर अपने छात्र जीवन में ही राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने 1967 से 1989 के बीच तीन कार्यकालों तक तमिलनाडु विधान सभा के सदस्य के रूप में सेवा की। इसके अतिरिक्त वह तत्कालीन तमिलनाडु विधान परिषद तथा चौदहवीं लोकसभा के भी सदस्य रहे।

सभापति ने कहा कि श्री गणेशन ने किसानों के आंदोलनों और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा और उनके निधन से देश ने एक अनुभवी और प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि को खो दिया है।

श्री राधाकृष्णन ने कहा कि श्री कलमाड़ी का 81 वर्ष की आयु में गत 6 जनवरी को निधन हो गया। वह 1982 से 1988, 1988 से 1994, 1994 से 1996 तथा 1998 से 2004 तक चार बार राज्यसभा के सदस्य रहे और सदन में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। वह ग्यारहवीं, चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के भी सदस्य रहे।

सभापति ने कहा कि एक मई 1944 को महाराष्ट्र के पुणे में जन्मे श्री कलमाड़ी पुणे की खड़कवासला स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय वायुसेना में एक पायलट के रूप में की।

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