लखनऊ , जनवरी 26 -- उत्तर प्रदेश दिवस के उपलक्ष्य में संस्कृति विभाग द्वारा जन भवन में सोमवार को आयोजित अलंकरण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कला, संस्कृति, साहित्य, नाट्य, खेल तथा बौद्ध व जैन दर्शन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाशाली विभूतियों को सम्मानित किया।

राज्यपाल ने सम्मानित कलाकारों और विद्वानों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सम्मान वर्षों की साधना और तपस्या का प्रतीक हैं तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक गणतंत्र भले ही युवा हो, लेकिन उसकी जड़ें मानवीय मूल्यों और नैतिक आदर्शों में गहराई से जुड़ी हैं। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे निर्भीक होकर आगे बढ़ें और जोखिम लेने से न घबराएं, क्योंकि साहस ही नवाचार की पहली सीढ़ी है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज 'न्यू इंडिया' के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। महिला सुरक्षा के लिए हर थाने में महिला हेल्प डेस्क, मेट्रो विस्तार, 'नमो भारत' रैपिड रेल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और रक्षा औद्योगिक गलियारे जैसी पहलें प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जा रही हैं। राज्यपाल ने 'एक जिला एक उत्पाद' योजना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भूमिका को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम में बाबा योगेन्द्र कला सम्मान, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सम्मान, आचार्य भरतमुनि सम्मान तथा बिरसा मुंडा सम्मान सहित अनेक पुरस्कार प्रदान किए गए। बाबा योगेन्द्र कला सम्मान से नलिनी कुमार मिश्रा, डॉ. साधना सिंह व सतेन्द्र सिंह को सम्मानित किया गया। पालि साहित्य संवर्धन सम्मान प्रो. प्रद्युम्न दुबे को तथा बौद्ध संस्कृति संवर्धन सम्मान डॉ. राहुल बोधि व प्रो. सिद्धार्थ सिंह को दिया गया। जैन संस्कृति संवर्धन पुरस्कार डॉ. सुनील कुमार जैन 'संचय' को मिला।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण व कलाकारों के उत्थान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में गुजरात के कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

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