देहरादून , अप्रैल 08 -- आगामी 10 अप्रैल को उत्तराखंड में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह द्वारा स्व गणना के साथ ही राज्य में जनगणना की शुरुआत हो जायगी।

आगामी 10 से 24 अप्रैल तक 15 दिवसीय चलने वाली और देश में पहली बार हो रही इस डेटा आधारित स्व गणना में उत्तराखंड वासी अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसईडॉटसेंससडॉटजीओवीडाॅटइन पोर्टल पर लॉग इन कर प्रगणक के आने से पहले बड़ी आसानी से अपना विवरण डिजिटल रूप से स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

इसके बाद जनगणना का पहला चरण आगामी 25 अप्रैल से 24 मई के बीच 30 दिन की अवधि में पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। जिसमें मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की जायगी। इस कार्य के लिए तक़रीबन 30,000 प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों की नियुक्ति होगी।

राज्य के सचिव जनगणना दीपक कुमार और निदेशक आइएएस इवा आशीष श्रीवास्तव ने बुधवार को दो अलग-अलग संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा एक अप्रैल से जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की शुरुआत कर दी है, जो देश के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान का आरंभ है। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा वाली भारत की पहली जनगणना है।

श्री कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना के प्रथम चरण, जिसमे मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई के बीच 30 दिन की अवधि में पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि घर-घर सर्वेक्षण से पहले 10 से 24, अप्रैल के बीच 15 दिन की अवधि प्रदेशवासियों को स्व-गणना के लिए प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि स्व -गणना एक सुरक्षित और वेब आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

निदेशक, जनगणना इबा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि दूसरे चरण में राज्य के हिमाच्छादित जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी के 131 गांव और तीन नगरीय क्षेत्रों में जनगणना का कार्य माह सितंबर में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहली बार उत्तरदाताओं को प्रगणकों के आने से पहले अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प उपलब्ध है। जबकि प्रगणक पिछली जनगणनाओं की तरह सभी आवंटित ब्लॉकों में घर-घर जाएंगे, जबकि स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में काम करेगी। उन्होंने बताया कि स्व-गणना में सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनीक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे बाद में प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान उनसे साझा किया जा सकता है।

श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना को सभी प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण का कार्य पूरे राज्य में गतिमान हैं। जिसके किये इन्हे 650 बैच में बांटा गया है। जिन्हें राज्य में नियुक्त दो नेशनल ट्रेनर, 23 मास्टर ट्रेनर एवं 555 फ़ील्ड ट्रेनर द्वरा प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के चरण के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इन महत्वपूर्ण संकेतकों को दर्ज करने के लिए जनवरी 2026 में प्रथम चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे स्व-गणना के माध्यम से या प्रगणक को पूर्ण सहयोग देकर इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें।

संवाददाता सम्मेलन में एस. एस. नेगी, संयुक्त निदेशक, तान्या सेठ, उप निदेशक, आर के बनवारी, उप निदेशक एवं प्रवीन कुमार उप निदेशक एवं पीआईबी देहरादून के संजीव सुन्द्रियाल, सहायक निदेशक और सूचना एवं लोक संपर्क विभाग से उप निदेशक रवि बिजारणियां, नगर निगम आयुक्त नमामि बंसल आदि मौजूद रहे।

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