नैनीताल , मार्च 07 -- उत्तराखंड में सरोवर नगरी नैनीताल में राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्य निजी व्यक्तियों से कराये जाना दो रजिस्ट्रार कानूनगो को महंगा पड़ गया है। जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों निलंबित रजिस्ट्रार कानूनगो कोपदावनत कर दिया है।
विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने शनिवार को यह दंडादेश जारी किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो भूपेश चंद और अर्जुन सिंह बिष्ट पर अपने पद से जुड़े वैधानिक राजस्व कार्य निजी एवं अनधिकृत व्यक्तियों से कराने के आरोप लगे थे। मामले को गंभीर मानते हुए प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसके बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।
जांच अधिकारी द्वारा दस्तावेजी साक्ष्यों, अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर आरोपों को सही पाया गया। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखीय कार्यों में निजी व्यक्ति की सहायता ली, जो नियमों के विरुद्ध है।
कारण बताओ नोटिस के जवाब में संबंधित कार्मिकों ने अधिक कार्यभार और लंबित मामलों के दबाव के चलते निजी व्यक्तियों की मदद लेने की बात स्वीकार की गई। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में वैधानिक शक्तियों को निजी व्यक्तियों को सौंपना स्वीकार्य नहीं है और यह राजकीय अभिलेखों की गोपनीयता व विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित