पटना, अप्रैल 13 -- राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि अंतिम नागरिक तक आर्थिक न्याय पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सोमवार को सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर राजस्व व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।
प्रधान सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार की ओर से 18 दिसंबर 2025 से लागू सात निश्चय-3 के सातवें स्तंभ के रूप में इज ऑफ लिविंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य के नागरिकों तक (आर्थिक न्याय) सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि आर्थिक न्याय भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 38 तथा 39 (बी) और (सी) में निहित है, जिसे व्यवहारिक रूप में लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि डिजिटल डिवाइड के कारण राजस्व प्रशासन की कई योजनाएं अभी भी कतार में खड़े अंतिम नागरिक तक नहीं पहुँच पा रही हैं, जो चिंता का विषय है। ऐसे में अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारी केवल प्रशासनिक इकाई ही नहीं बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।
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