बेतिया , फरवरी 6 -- बिहार रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन (बिरसा) के आह्वान पर राज्यभर में जारी राजस्व अधिकारियों एवं अंचलाधिकारियों की हड़ताल पर बिहार प्रशासनिक सेवा संघ (बासा) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि ऐसे कदमों के माध्यम से जनहित की उपेक्षा चिंताजनक है।
इस संबंध में बासा की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें राजस्व सेवा संघ के मांग-पत्र तथा हड़ताल के औचित्य पर विस्तार से चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आपत्ति दर्ज की गई।
बैठक की अध्यक्षता बासा के अध्यक्ष सह अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा ने की। बैठक में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार, वरीय उप समाहर्ता सुजीत कुमार सहित अन्य वरीय उप समाहर्ता स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।बासा ने स्पष्ट किया कि भूमि सुधार उप समाहर्ता का पद परंपरागत रूप से बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग के अंतर्गत रहा है। बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग-2025 की अधिसूचना के अनुसार वरीय उप समाहर्ता के पदों पर अन्य सेवाओं की प्रोन्नति सीमित एवं नियमबद्ध है। ऐसे में इन पदों पर प्रत्यक्ष नियुक्ति नियमसंगत है और प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त नही है।
संघ ने कहा कि मंत्रिमंडल के निर्णय और सरकारी संकल्प जारी होने के मात्र दो दिन बाद हड़ताल पर जाना प्रशासनिक परिपक्वता के अनुरूप नहीं है। अंचलाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों से आम जनता का सीधा सरोकार है, ऐसे में जनहित की उपेक्षा चिंताजनक है।बासा ने किसी भी सेवा या संवर्ग को अक्षम बताए जाने की निंदा करते हुए कहा कि शासन-प्रशासन सहयोग, समन्वय और साझा उत्तरदायित्व पर आधारित होता है। संघ ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार सभी पक्षों से संवाद स्थापित कर जनहित और प्रशासनिक समन्वय को सर्वोपरि रखते हुए समाधान निकालेगी।
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