जयपुर , फरवरी 13 -- राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि प्रदेश में किसानों को मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इस वर्ष यूरिया की मांग के मुकाबले तीन लाख टन अधिक यूरिया उपलब्ध कराया गया है।

डॉ मीणा प्रश्नकाल में विधायक इन्द्रा के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की वितरण व्यवस्था और गुणवत्ता से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर विभागीय स्तर पर जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय ऐसी शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता था जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किसानों के हितों की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा बड़े स्तर कार्यवाहियां की गई हैं। इसके तहत 11 हजार 938 निरीक्षण किए गए। अनियमितताओं के विरुद्ध 107 एफआईआर दर्ज की गईं तथा 605 प्रकरणों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 178 लाइसेंस निलंबित किए गए, 46 लाइसेंस निरस्त किए गए तथा 28 मामलों में पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां की गईं। वहीं 16 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए गए, 21 मामलों में न्यायालय से अग्रिम जमानत ली गई और 27 उर्वरक निर्माण फैक्ट्रियों को सील करने की कार्रवाई भी की गई।

इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि कृषकों को फसल सीजन के दौरान मांग अनुसार उर्वरकों की उपलब्धता कराई गई है। राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान गत जनवरी तक की 24.43 लाख टन मांग के विरुद्ध 27.93 लाख टन यूरिया उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार 8.33 लाख टन की मांग के विरुद्ध 8.30 लाख टन डीएपी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त डीएपी के वैकल्पिक उर्वरक एनपीके 2.57 लाख टन एवं सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) 4.56 लाख टन की उपलब्धता करायी गई है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की आपूर्ति निरन्तर जारी है।

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं में विभिन्न खरीफ एवं रबी फसलों के प्रमाणीत बीज को राज्य एवं केन्द्र सरकार की बीज उत्पादक संस्थाओं के द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से कृषकों को फसल बुवाई से पूर्व अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री बीज स्वावलम्बन योजना एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन की समन्वित योजना, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन एवं बीज मिनिकिट कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को प्रमाणित बीज नि:शुल्क रूप से उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

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