जयपुर , अप्रैल 28 -- राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के माध्यम से आपूर्तित सैनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता को लेकर उठाए गए सवालों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की बेटियों एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।

श्री खींवसर ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि सैनेटरी नैपकिन की खरीद पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता मानकों और वित्तीय अनुशासन के साथ की जा रही है। वर्तमान में सैनेटरी नैपकिन की खरीद केन्द्र सरकार के उपक्रम एचएलएल लाइफकेयर के माध्यम से 11.34 रुपये प्रति पैकेट की दर से की जा रही है। यह दर पूर्व वर्षों की तुलना में काफी कम है। कांग्रेस सरकार में वर्ष 2022 में यही खरीद 16.80 रुपये प्रति पैकेट की दर से की गई थी।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार वर्तमान खरीद दर वर्ष 2022 की तुलना में 5.46 रुपये प्रति पैकेट कम है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 161.18 करोड़ रुपये की संभावित बचत होगी। यह बचत सीधे जनकल्याणकारी योजनाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में उपयोग की जा सकेगी।

श्री खींवसर ने कहा कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति शुरू होने से पहले सैंपल की जांच कराई गई थी। इसके बाद भी गुणवत्ता मानकों का पूरा ध्यान रखने के दृष्टिगत विभिन्न जिलों से रैंडम सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया गया। अब तक 12 बैचों में से 10 बैचों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और सभी रिपोर्ट तकनीकी मानकों के अनुरूप पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि वजन, ब्लड एब्जॉर्प्शन क्षमता, थिकनेस, लंबाई सहित सभी प्रमुख पैरामीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।

श्री खींवसर ने कहा कि वर्तमान में आपूर्ति किए जा रहे सैनेटरी नेपकिन को लेकर लाभार्थियों की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। जिन विभागों को नेपकिन की आपूर्ति की जा रही है, उन्होंने भी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। यदि किसी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि अभी तक आपूर्ति किए गए नैपकिन के विरुद्ध कोई भुगतान भी नहीं किया गया है। अगर गुणवत्ता परीक्षण में कोई कमी पाई जाएगी तो नियमानुसार भुगतान में कटौती सहित अन्य कार्रवाई की जाएगी।

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