जयपुर , फरवरी 04 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और वृद्धाश्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में व्यापक ऑडिट (निरीक्षण) कराने का बुधवार को आदेश दिये।

न्यायमूर्ति पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की पीठ ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रत्येक जिले के आश्रमों में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सा सेवाओं, आवासीय व्यवस्था एवं अन्य कल्याणकारी उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हैं।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि केवल आश्रमों का अस्तित्व होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह आवश्यक है कि उनमें वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं मिलें। हाल में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 31 वृद्धाश्रम संचालित हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है।

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि वरिष्ठ नागरिक कल्याण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार है। अदालत ने अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने के उपाय सुनिश्चित करना बताया गया है।

न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पुराने आश्रमों के संचालन में सुधार के लिए उठाए गए कदमों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

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