जयपुर , फरवरी 09 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. महिपाल सिंह सिहाग को विभागाध्यक्ष के पद पर पुनः बहाल करने का आदेश दिया है।
यह आदेश उस विवाद के बीच आया है जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए विभागाध्यक्ष के पद से हटाया था।
उच्च न्यायालय ने सोमवार को आदेश में कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति और पद हटाने की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियाँ की हैं और इस तरह के निर्णय लेने से संस्थागत नियमों और अकादमिक अखंडता को नुकसान पहुँचता है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि डॉ. सिहाग को तत्काल प्रभाव से भूगोल विभाग का प्रमुख पद सौंपा जाए और भविष्य में इस प्रकार के फेरबदल से बचा जाए।
डॉ. सिहाग, जो राजस्थान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षक हैं, को जुलाई 2023 में विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। परंतु कुछ ही महीनों बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ एक फर्जी शिकायत के आधार पर बिना मानक प्रक्रिया का पालन किए उन्हें पद से हटा दिया। उन पर समय पूर्व हटाने के बावजूद विभाग के नेतृत्व में बदलाव किया गया और एक कनिष्ठ प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाया गया था।
डॉ. सिहाग ने पहले विश्वविद्यालय के प्रशासन के सामने अपने अधिकारों की वकालत की थी, लेकिन जब कोई समाधान नहीं मिला तो उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की थी। इस हड़ताल के दौरान उन्होंने प्रशासन पर उनके साथ योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि विश्वविद्यालय को अपनी नियुक्ति प्रक्रियाओं का संपूर्ण और पारदर्शी लेखा-जोखा प्रस्तुत करना चाहिए और केवल वरिष्ठता, योग्यता और नियमों के अनुसार ही विभागाध्यक्ष जैसे संवेदनशील पदों पर निर्णय लेना चाहिए। अदालत ने डॉ. सिहाग को वरिष्ठता के अनुरूप सभी लाभ और अधिकार दिए जाने के भी निर्देश दिये।
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