हनुमानगढ़ , फरवरी 09 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में राज्य सरकार द्वारा संचालित अटल भूजल योजना के तहत खेतों में पानी की डिग्गियां (जल संरक्षण टैंक) बनाने वाले किसानों को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनुदान राशि न मिलने पर राजमार्ग पर धरने देने वाले किसान नेताओं और किसानों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों और किसान नेताओं ने छह फरवरी को हनुमानगढ़-रावतसर मेगा हाईवे पर कोहला टोल प्लाजा के समीप धरना देकर विरोध जताया था, जिसके बाद हनुमानगढ़ टाउन पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि बिना प्रशासनिक अनुमति के यातायात अवरुद्ध करने और जनता को परेशानी पहुंचाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर रामकेर द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। इसमें रेशमसिंह, मनुका रायसाहब चाहर, कामरेड सुरेंद्र शर्मा, सुभाष गोदारा मक्कासर, संदीप कंग, शेरसिंह शाक्य, काकासिंह, रोनी कपूर, सचिन कौशिक, जयदेव भिडासर, कामरेड आत्मासिंह, अमन सिंह हिरणावाली, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की जिला कार्यसमिति सदस्य, अखिल भारतीय ग्रामीण खेत मजदूर यूनियन के हनुमानगढ़ जिलाध्यक्ष जगजीतसिंह जग्गी, बलविंदरसिंह गुरुसर, रविंद्रसिंह चक ज्वालासिंहवाला, जाकिर हुसैन सहित अन्य किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं।
पुलिस में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि इन लोगों ने राजमार्ग पर टोल प्लाजा के पास धरना लगाकर यातायात बाधित किया, जिससे आम लोगों को भारी असुविधा हुई। मामले की जांच पुलिस उप निरीक्षक मोहरसिंह को सौंपी गई है।
अखिल भारतीय ग्रामीण खेत मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष जगजीतसिंह जग्गी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्रवाई किसानों की आवाज दबाने का प्रयास है, लेकिन इससे वे घबराने या पीछे हटने वाले नहीं हैं। जग्गी ने बताया कि अटल भूजल योजना के तहत हनुमानगढ़ जिले में लगभग 1269 से अधिक किसानों ने खेतों में डिग्गियां बनाई हैं, लेकिन पिछले 10 महीनों से अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कई किसानों ने कर्ज लेकर ये निर्माण कार्य कराए और अब वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
जग्गी ने बताया कि राज्य सरकार ने शुरू में 31 मार्च 2025 तक डिग्गियां बनाने पर अनुदान देने की घोषणा की थी। उस समय खेतों में गेहूं जैसी फसलें तैयार खड़ी थीं। घोषणा के प्रभाव से किसानों ने जल्दबाजी में डिग्गियां बनानी शुरू कर दीं और कई को तो फसल पकने से पहले ही काटनी पड़ी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। जब अंतिम तिथि नजदीक आई तो सरकार ने इसे बढ़ाकर 25 अप्रैल 2025 कर दिया। जग्गी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि सरकार ने शुरू में ही 25 अप्रैल की तिथि तय की होती तो किसानों को फसलें समय से पहले नहीं काटनी पड़तीं और उनका नुकसान टल जाता।
उन्होंने बताया कि इस अवधि तक जिले में 1269 किसानों ने डिग्गियां पूरी कर लीं, लेकिन अनुदान का भुगतान अब तक नहीं हुआ। सरकार ने वित्तीय मंजूरी दे दी है, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें बजट अब तक नहीं मिला। इसी मुद्दे पर किसानों ने छह फरवरी को काफी संख्या में किसानों ने टोल प्लाजा पर धरना दिया था।
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