लखनऊ , अप्रैल 19 -- राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी और प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और इसे राजनीतिक दिखावा करार दिया। प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री महिलाओं को न्याय दिलाने के प्रति गंभीर हैं तो भाजपा किसी महिला को प्रधानमंत्री क्यों नहीं बना पा रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा, लोकसभा अध्यक्ष, पार्टी अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों में किसी सक्षम महिला को शीर्ष पद पर नियुक्त करे।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर जनता को गुमराह किया गया है। तिवारी ने कहा कि वर्ष 2023 में कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन कर उसे पारित कराया था, लेकिन तीन वर्ष बाद भी इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति और नीयत दोनों संदिग्ध रही हैं।
तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन से जुड़े संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई गई। उनके अनुसार केंद्र सरकार संघीय ढांचे पर आघात करना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने विफल कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि विपक्ष ने एकजुट होकर संविधान की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की नीयत साफ होती तो वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक अब तक लागू हो चुका होता और संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक मजबूत होता।
मोना ने उत्तर प्रदेश की महिलाओं से प्रधानमंत्री को माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि उन्नाव और हाथरस जैसे मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने का कानून कांग्रेस शासनकाल में लाया गया था, जिसका उस समय भाजपा ने विरोध किया था।
उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि बैसाखियों पर चल रही सरकार को इस प्रकार की बयानबाजी शोभा नहीं देती।
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