राजनांदगांव , मई 01 -- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की देशी और अंग्रेजी शराब दुकानों में पिछले कुछ दिनों से मदिराप्रेमियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि सरकारी दुकानों से पसंदीदा ब्रांड पूरी तरह नदारद हैं, जिसका सीधा आर्थिक फायदा निजी बीयर बार संचालकों को मिल रहा है। शराब प्रेमियों ने इस अव्यवस्था को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी जताई है। उपभोक्ताओं का साफ आरोप है कि यह किल्लत प्राकृतिक नहीं, बल्कि निजी बार मालिकों की जेब भरने के लिए जानबूझकर पैदा की गई है। बाजार में इस वक्त 'गोल्डन गोवा' ब्रांड की मांग चरम पर है लेकिन सरकारी काउंटरों पर इसकी उपलब्धता शून्य बनी हुई है। ताज्जुब की बात यह है कि जो ब्रांड सरकारी दुकानों में नहीं मिल रहा, वह कोचियों के पास भारी मात्रा में उपलब्ध है।
गांव-गांव में कोचिए मई 2025 की निर्मित 'गोल्डन गोवा' के पव्वे (मूल्य 120 रुपये) को 180 रुपये में धड़ल्ले से बेच रहे हैं। शौकीनों पूछ रहे है कि जब सरकारी दुकानों में स्टॉक नहीं है, तो कोचियों के पास साल भर पुराना माल कहाँ से आ रहा है? और निजी बारों में माल की निर्बाध आपूर्ति कैसे हो रही है?सूत्रों के अनुसार, इस किल्लत के पीछे एक बड़ी वजह पैकेजिंग में बदलाव को माना जा रहा है। चर्चा है कि अब शराब कांच के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में आने वाली है। इस बदलाव की प्रक्रिया के कारण पुराने स्टॉक और नई सप्लाई के बीच तालमेल पूरी तरह बिगड़ गया है। इसी 'ट्रांजिशन पीरियड' का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
राजनांदगांव जिले में शराब की खपत का ग्राफ काफी ऊंचा है। सामान्य दिनों में जिले में लगभग 60 से 70 लाख रुपये की शराब बिकती है। वहीं पिछले एक हफ्ते से मांग की तुलना में आपूर्ति केवल 40 से 50 प्रतिशत तक सिमट गई है।
आपूर्ति घटने से रोजाना लाखों रुपये के सरकारी राजस्व का भी घाटा हो रहा है। वहीं, दुकानों में माल न होने से मजबूरन लोग बीयर बार का रुख कर रहे हैं, जहाँ उन्हें दोगुने से ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
जिले के आबकारी अधिकारी अभिषेक तिवारी का कहना कि "अंग्रेजी शराब दुकानों में कुछ दिनों से जरूरत के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यह समस्या अस्थायी है और आगामी कुछ दिनों के भीतर सप्लाई चेन को दुरुस्त कर लिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग कब तक आपूर्ति बहाल कर पाता है या फिर शराब प्रेमियों को इसी तरह ब्रांडेड शराब के लिए भटकना पड़ेगा और कोचियों व बार संचालकों की जेबें भरती रहेंगी।
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