राजनांदगांव , फरवरी 04 -- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला अस्पताल बसंतपुर में इलाज के दौरान एक प्रसूता महिला की मौत का मामला बीती रात सामने आया है, जिसने जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान करुणा बासफोड (पति - तूफान बासफोड), निवासी एक आदिवासी परिवार की बहू के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, करुणा बासफोड को 27 जनवरी को प्रसव पीड़ा के चलते जिला अस्पताल बसंतपुर में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि लगातार बिगड़ती हालत के बावजूद एक फरवरी तक न तो समय पर ऑपरेशन किया गया और न ही कोई ठोस चिकित्सकीय निर्णय लिया गया। अंततः एक फरवरी को सामान्य प्रसव कराया गया, लेकिन इसके बाद भी प्रसूता की स्थिति गंभीर बनी रही।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट अभिमन्यु मिश्रा, संदीप सोनी एवं करण कन्नौजे को जब महिला की नाजुक स्थिति की जानकारी मिली, तो उन्होंने तत्काल मानवीय पहल करते हुए नवजात शिशु को गांधी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। इसी बीच रात में प्रसूता को आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां कुछ ही समय बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि प्रसूता 27 जनवरी से अस्पताल में भर्ती थी, तो समय पर आवश्यक इलाज क्यों नहीं किया गया? ऑपरेशन में हुई देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? और गंभीर स्थिति में रेफर करने में इतनी लापरवाही क्यों बरती गई ?मामले की जानकारी मिलने पर मृतका के परिजनों के साथ कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें चिकित्सकों के साथ-साथ कांग्रेस की ओर से अभिमन्यु मिश्रा को भी शामिल किया गया है। कांग्रेस ने मांग की है कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि दोषी डॉक्टरों एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कलेक्टर द्वारा नवजात शिशु के नि:शुल्क इलाज, मृतका के बड़े पुत्र को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में नि:शुल्क शिक्षा तथा पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता दिए जाने की घोषणा की गई है।

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