रांची , फरवरी 17 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राजधानी रांची में सीएनची एक्ट को लेकर सरकार पर बड़ा निशाना साधा है।

श्री मरांडी ने कहा कि राजधानी रांची में खुलेआम सीएनटी एक्ट की अवहेलना हो रही है। न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन दखल-दिहानी कराने में विफल साबित हो रहा है। अरगोड़ा अंचल में महतो उरांव की 1.19 एकड़ जमीन को चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें दखल नहीं मिल सका है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

श्री मरांडी ने कहा कि रांची में आदिवासी भूमि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सत्ताधारी नेताओं, बिल्डरों तथा प्रभावशाली लोगों द्वारा सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा है और उस पर अपार्टमेंट-बैंक्वेट हॉल जैसे निर्माण किए जा रहे हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन एक तरफ 'जल, जंगल, जमीन' का नारा देते हैं, लेकिन दूसरी ओर दुमका से लेकर रांची, रामगढ़, धनबाद और जमशेदपुर तक आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। आदिवासियों का जमीन हड़पने जो प्रवृत्ति कभी शिबू सोरेन जी के दौर में शुरू हुई थी, आज वही व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है। चाहे आदिवासी जमीन हो, आवास बोर्ड की भूमि हो या गैर-मजरुआ जमीन... हर जगह अवैध कब्जे का खेल चल रहा है।

श्री मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार को इस गंभीर प्रकरण पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और महतो उरांव को उनकी जमीन पर विधिसम्मत अधिकार दिलाना सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर पूरे राज्य, विशेषकर राजधानी रांची में लोभ, भय और प्रलोभन के बल पर आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़ा करने वाले माफियाओं और प्रभावशाली तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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