नयी दिल्ली , फरवरी 02 -- राज्यसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने देश में सामाजिक सद्भावना की बिगड़ती स्थिति और बढती आर्थिक असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में न सबका साथ है और न ही सबका विकास है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया है लेकिन मौजूदा स्थितियां सवाल उठाती हैं कि क्या सरकार को अल्पसंख्यकों , मुस्लिमों , आदिवासियों और दलितों आदि का साथ है। उन्होंने सवाल किया , " क्या मोदी जी को सबका साथ मिला है और सबका विकास हुआ है। " उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक समरसता बिगड़ रही है और आर्थिक असमानता निरंतर बढ रही है। अल्पसंख्यकों काे न्याय नहीं मिल रहा है और न ही जीवन जीने के समान अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां और योजनाएं बताती हैं कि न सबका साथ है और न ही सबका विकास है। उन्होंने कहा कि यदि समाजिक समरसता पर हो रहे प्रहारों और आर्थिक असमानता की बढती खाई को नहीं रोका गया तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जायेगा।
श्री सिंह ने किसी का नाम लिये बिना कहा कि एक विचारधारा देश में नफरत फैलाने में जुटी है और कट्टरपंथी ताकतों द्वारा हिन्दू और मुसलमानों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काया जा रहा है। इससे देश में सामाजिक सद्भावना की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉरपोरेट जगत को कर में छूट दे रही है और मजदूरों की मजदूरी ज्यों की त्यों है उसे नहीं बढाया जा रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा नारा बनकर रह गयी है और उनकी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का वादा भी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डेढ लाख से अधिक स्कूल बंद किये जा चुके हैं और शिक्षकों के पद नहीं भरे जा रहे।
उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत से अधिक कर आम आदमी दे रहा है। सरकार की नीतियां आम आदमी , गरीब और किसान विरोधी हैं। युवाओं को स्थायी के बदले परोक्ष रूप से रोजगार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है और चीन ने भारत के दो हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। भारतीय सेना 26 प्वाइंटों पर गश्त नहीं लगा पा रही है और प्रधानमंत्री को सुरक्षा से जुड़े मामलों पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार की नीतियों से देश में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है और वह इसे संवैधानिक संकट की स्थिति मानते हैं।
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