एमसीबी , दिसंबर 14 -- मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की गोद में स्थित मुरेरगढ़ एक ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां प्रकृति की अनुपम सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और गहरी धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। लगभग 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पहाड़ी एमसीबी जिले की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है और प्राकृतिक हिल स्टेशन के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ से लगभग 105 किलोमीटर दूर केल्हारी-चुटकी-भंवरखोह मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है।

जिला पीआरओ द्वारा रविवार को प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया मुरेरगढ़ का ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है, पर्वत शिखर पर स्थित प्राचीन किले के अवशेष इसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के अनुसार यह किला संभवतः पूर्ववर्ती शासक बालंदशाह राजा द्वारा निर्मित गढ़ी रहा होगा। यद्यपि वर्तमान में यह भग्न अवस्था में है, फिर भी रियासतकालीन इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्राकृतिक दृष्टि से मुरेरगढ़ अत्यंत समृद्ध है। यहां प्राकृतिक गुफाएं, वर्षभर जलयुक्त रहने वाला कुआं, प्राचीन तालाब, गुफाओं से निकलने वाला मीठा एवं पीने योग्य जल, चारों ओर फैली घनी हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। स्थानीय जनमानस में यह पर्वत "सिद्ध बाबा पर्वत" के नाम से प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि, नवरात्रि और दीपावली के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के लिए पहुंचते हैं।

मुरेरगढ़ अपने दुर्गम मार्गों, रहस्यमय वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण नेचर, एडवेंचर और हेरिटेज टूरिज्म की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। जिला प्रशासन द्वारा इसकी विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को भेजी जा चुकी है। आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ यह स्थल भविष्य में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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