नयी दिल्ली , दिसंबर 12 -- इटली के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री एंटोनियो ताजानी भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को गति प्रदान करने के मकसद से बुधवार को नयी दिल्ली पहुंचे।
श्री ताजानी इस साल दूसरी बार भारत के दौरे पर आये हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, "इटली के उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री एंटोनियो ताजानी का नयी दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। इस साल यह उनकी भारत की दूसरी यात्रा है। दिल्ली और मुंबई में उनके कार्यक्रम भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे।"श्री ताजानी का यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए इटली की लगातार कोशिशों का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह बुधवार को यहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलेंगे और फिर गुरुवार को आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए मुंबई जाएंगे। वह शुक्रवार को मुंबई से इटली के लिए रवाना होंगे।
श्री ताजानी का यह दौरा 23 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ हुई मुलाकात के बाद हो रहा है। उस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, इनोवेशन, कृत्रिम बुद्धि (एआई) , अंतरिक्ष और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर चर्चा की थी।
बैठक के बाद श्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, "प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी लगातार मज़बूत हो रही है, जिससे हमारे देशों के लोगों को बहुत फ़ायदा हो रहा है।"उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, "हमने व्यापार, निवेश, रक्षा, इनोवेशन, एआई, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की।"उन्होंने एक नयी पहल की भी घोषणा करते हुए कहा, "भारत और इटली आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में सहयोग के लिए एक संयुक्त पहल की घोषणा कर रहे हैं। यह एक ज़रूरी और सही समय पर उठाया गया कदम है, जो आतंकवाद और उसके समर्थक नेटवर्क के खिलाफ़ मानवता की लड़ाई को मज़बूत करेगा।"गौरतलब है कि भारत और इटली के बीच कूटनीतिक संबंध की शुरुआत 1947 में हुई थी और 2023 में दोनों देशों में अपने रिश्तों की 75वीं सालगिरह मनायी थी। इटली अभी जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड्स के बाद यूरोपियन यूनियन में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
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