जालौन , मार्च 23 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के सैदनगर गांव में स्थित रक्तदंतिका शक्तिपीठ आस्था, रहस्य और चमत्कार का अद्भुत संगम माना जाता है। जिला मुख्यालय उरई से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्फटिक पहाड़ों के बीच बेतवा नदी के किनारे विराजमान यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां माता सती के दांत गिरे थे। इसी कारण इसे 'रक्तदंतिका' के नाम से जाना जाता है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिमोहन पुरवार ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया, तब शिव शोक और क्रोध में सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को खंडित किया, और उनके दांत इस स्थान पर गिरे, जिससे शक्ति का प्राकट्य हुआ।
महंत फलाहारी बाबा ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में आज भी दो दंत शिलाएं स्थापित हैं, जिन्हें अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। इन शिलाओं पर जल अर्पित करने पर वे कुछ ही देर में रक्तिम हो जाती हैं। देवी की प्रतिमा के साथ इन शिलाओं की विशेष पूजा भी की जाती है। इस शक्तिपीठ का उल्लेख दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाता है।
मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी परंपरा यह रही कि पहले कोई भी साधक या भक्त रात में यहां नहीं रुक पाता था। जो भी रात्रि प्रवास करने की कोशिश करता, उसके साथ अनहोनी की घटनाएं सामने आतीं। यह परंपरा तब बदली जब साधु 'लंका महाराज' यहां आए और बिना भय के साधना की। उनके बाद श्रद्धालु धीरे-धीरे रात्रि प्रवास करने लगे। आज नवरात्र के दौरान बने आश्रय स्थलों में भक्त ठहरते हैं और भंडारे का आयोजन भी करते हैं।
पूर्व में यह शक्तिपीठ तंत्र-मंत्र साधना का प्रमुख केंद्र था और बलि देने की परंपरा भी प्रचलित थी। वर्तमान में प्रशासन और समाज के प्रयासों से यह बंद कर दिया गया है और केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है।
चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर की महत्ता और बढ़ जाती है। नौ दिनों तक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और बिहार सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने पर उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
सदियों पुराना यह रक्तदंतिका शक्तिपीठ आज भी श्रद्धा और रहस्य का केंद्र बना हुआ है, जहां आस्था के साथ कई अनसुलझे रहस्य भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
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