लखनऊ , मार्च 30 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि यह बहुप्रतीक्षित पहल है, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कार्यकत्रियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि अब हर आंगनवाड़ी कार्यकत्री के पास स्मार्टफोन होना जरूरी है, ताकि कार्यों का रियलटाइम डेटा उपलब्ध हो सके और योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर ढंग से हो पाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे आंगनवाड़ी सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
योगी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 3 से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू की जा रही है। इसके लिए पूर्व में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित करीब 27 हजार केंद्र अब आंगनवाड़ी व्यवस्था को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे कार्यकत्रियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान देश के भविष्य को संवारने का प्रयास है। यदि नवजात शिशु सुपोषित होगा और मां स्वस्थ होगी, तो देश का भविष्य स्वतः सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सरकार ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और इन योजनाओं की असली वाहक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां ही हैं।
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को उनकी भूमिका के अनुरूप 'यशोदा मैया' की उपाधि दी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यशोदा मैया ने भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया, उसी तरह आज आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां देश के बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही हैं। यह एक बड़ा सम्मान है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पोषाहार वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियां थीं और माफिया तंत्र हावी था। गुणवत्ता भी खराब थी और कई जगह पोषाहार जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था में सुधार किया है, जिससे बच्चों और माताओं को बेहतर पोषण मिल रहा है।
योगी ने कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी, आशा और एएनएम कार्यकत्रियों ने फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया और कोविड प्रबंधन में सरकार के प्रयासों को सफल बनाया।
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