लखनऊ , दिसंबर 14 -- लखनऊ में सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ रविवार को वीरांगना अवंतीबाई जिला महिला चिकित्सालय से किया गया। अभियान की औपचारिक शुरुआत विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा ने तीन माह की बच्ची को पोलियोरोधी दवा पिलाकर की। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि और नर्सिंग छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।

विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पल्स पोलियो अभियान देश के सबसे सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। एक समय पोलियो भारत के लिए गंभीर चुनौती था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग, अन्य विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज की सामूहिक सहभागिता से इसका उन्मूलन संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि पोलियो मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्कता और जनसहभागिता बेहद जरूरी है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. बी. सिंह ने बताया कि सघन पल्स पोलियो अभियान 14 दिसंबर से 22 दिसंबर तक संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत जनपद में शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के कुल 7.03 लाख बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के पहले दिन रविवार को सरकारी विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 2783 बूथ बनाए गए थे।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, टैम्पो स्टैंड और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर ट्रांजिट बूथ भी लगाए गए हैं, ताकि यात्रा कर रहे बच्चों को भी पोलियो की खुराक से वंचित न रहना पड़े। बूथ दिवस पर जनपद में 2,16,482 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 15 से 19 दिसंबर तक 2204 टीमें घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाएंगी। अभियान को सफल बनाने के लिए 136 मोबाइल टीमें, 226 ट्रांजिट टीमें तथा लगभग 7,000 वैक्सीनेटरों की तैनाती की गई है। जो बच्चे इस अवधि में दवा लेने से छूट जाएंगे, उन्हें 22 दिसंबर को मॉप-अप राउंड के माध्यम से दवा पिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि ईंट-भट्टों पर काम करने वाले श्रमिकों, घुमंतू परिवारों और निर्माण कार्य स्थलों पर रहने वाले परिवारों के बच्चों को भी अभियान के तहत अनिवार्य रूप से पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी।

डॉ. एन. बी. सिंह ने अभिभावकों से अपील की कि सोते हुए बच्चे को पोलियो की दवा न पिलाएं, बल्कि उसे जगाकर ही दवा पिलवाएं। दवा पिलाने के बाद बच्चे की दाहिनी तर्जनी उंगली पर स्याही का निशान अवश्य लगवाएं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चे को खुराक मिल चुकी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित