प्रयागराज , फरवरी 28 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यूपी बोर्ड की पुस्तकें प्रकाशित करने वाले प्रकाशकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रकाशकों ने यूपी बोर्ड द्वारा पुस्तकों के प्रकाशन को लेकर जारी आदेश पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई है। प्रकाशकों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने हाल में आदेश जारी कर केवल तीन प्रकाशकों को 36 विषयों की 70 पुस्तकों के प्रकाशन का अधिकार प्रदान कर दिया है। उनका कहना है कि वे पिछले लगभग 50 वर्षों से, तीन-चार पीढ़ियों से प्रकाशन कार्य से जुड़े हैं, लेकिन उनके द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में भी नाराजगी है।
प्रकाशकों ने आरोप लगाया कि बोर्ड की ओर से प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और प्रबंधकों पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि स्वीकृत तीन प्रकाशकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें यदि विद्यालयों में पढ़ाई गईं तो संबंधित संस्थानों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रकाशकों ने बोर्ड के इस निर्णय को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि यूपी बोर्ड सचिव के 8 जनवरी के आदेश के विरुद्ध मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी एवं दो अन्य प्रकाशकों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि न्यायालय की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायाधीश नीरज तिवारी और न्यायाधीश गरिमा प्रसाद शामिल थे, ने 19 फरवरी को अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत बोर्ड को यह अधिकार है कि उससे संबद्ध विद्यालयों में केवल बोर्ड द्वारा स्वीकृत प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें ही पढ़ाई जाएं। न्यायालय के इस निर्णय के बावजूद प्रकाशक अपने पक्ष में निर्णय लिए जाने के लिये लगातार प्रयासरत हैं।
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