मथुरा , फरवरी 7 -- शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की प्रस्तावित गाइडलाइंस तथा अमेरिका के साथ हुई हालिया टैरिफ व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा समावेशी होनी चाहिए, न कि विभाजनकारी। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय परिसरों में किसी भी प्रकार का ध्रुवीकरण छात्रों के भविष्य के लिए प्रतिकूल हो सकता है। सांसद ने कहा कि संबंधित गाइडलाइंस "नैसर्गिक न्याय की भावना" के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश दिए जाने के बाद सरकार को इन गाइडलाइंस की पुनर्समीक्षा करनी चाहिए और ऐसा स्पष्ट ढांचा प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर मिले जनसमर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह सामाजिक न्याय और समान अवसरों से जुड़े विषयों को आगे भी उठाती रहेंगी। आर्थिक विषयों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अमेरिका के साथ हुई टैरिफ व्यवस्था को असंतुलित बताया। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समझौते समानता और पारस्परिक सहमति के आधार पर होने चाहिए।

उल्लेखनीय है कि यूजीसी गाइडलाइंस और टैरिफ संबंधी विषयों पर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित