चंडीगढ़ , जनवरी 24 -- हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के ड्राफ्ट नियम 2025में प्रस्तावित बदलावों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इन बदलावों को देश के संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया है और कहा है कि इससे राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसके बावजूद केंद्र सरकार यूजीसी के माध्यम से विश्वविद्यालयों पर एकतरफा और केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही है। नये ड्राफ्ट नियमों में राज्य सरकारों की भूमिका को सीमित कर दिया गया है, जिससे राज्यों की शैक्षणिक स्वायत्तता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जतायी। उनका कहना था कि प्रस्तावित नियमों के तहत कुलपतियों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम निर्माण और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है। इससे राज्य सरकारों को केवल औपचारिक भूमिका तक सीमित करने की कोशिश की जा रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन बदलावों से न केवल राज्यों की स्वायत्तता समाप्त होने का खतरा है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात पहुंच रहा है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस हमेशा से शिक्षा के अत्यधिक केंद्रीकरण के खिलाफ रही है और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की पक्षधर रही है।
श्री सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि यूजीसी के इन विवादास्पद ड्राफ्ट नियमों को तत्काल वापस लिया जाये और सभी राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाये। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इन नियमों को लागू करने पर अड़ी रही तो कांग्रेस छात्रों, शिक्षकों और राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनआंदोलन करेगी।
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