चेन्नई , जनवरी 29 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नये नियमों का स्वागत करते हुए कहा कि यह गहरी पैठ बना चुके भेदभाव और संस्थागत उदासीनता से प्रभावित उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक विलंबित लेकिन स्वागत योग्य कदम है।

श्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि यदि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार छात्रों की मौत रोकने, भेदभाव खत्म करने और पिछड़े समुदायों के छात्रों में 'ड्रॉपआउट' दर कम करने के प्रति गंभीर है, तो इन नियमों को न केवल मजबूत किया जाना चाहिए, बल्कि इनकी संरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिए संशोधित भी किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें बिना किसी दबाव के वास्तविक जवाबदेही के साथ लागू किया जाना चाहिए ताकि इसके मूल उद्देश्यों से समझौता न हो।

मुख्यमंत्री ने लिखा, "यूजीसी विनियम 2026 एक विलंबित लेकिन स्वागत योग्य कदम है। जब से केंद्र में भाजपा सत्ता में आई है, भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों की आत्महत्या के मामलों में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है।" उन्होंने कहा कि इसके साथ ही दक्षिण भारत, कश्मीर और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को निशाना बनाकर बार-बार हमले और उत्पीड़न की घटनाएं भी हुई हैं।

श्री स्टालिन ने उल्लेख किया कि इस संदर्भ में सुरक्षा उपाय केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक अपरिहार्य आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि जैसा कि मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर आरक्षण लागू करने के दौरान देखा गया था, वर्तमान यूजीसी के खिलाफ होने वाली प्रतिक्रिया भी उसी प्रतिगामी मानसिकता से प्रेरित है। केंद्र सरकार को ऐसे दबाव के कारण इन नियमों या उनके मूल उद्देश्यों को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।

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