अमरोहा , जनवरी 29 -- कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अमरोहा जिले के मंडी धनौरा में आयोजित विराट हिंदू महासम्मेलन में विशेष रूप से पधारे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से जुड़ी आशंकाओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से संयम और संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कोई भी ऐसा निर्णय या नियम जो समाज को बांटने या विभाजन को बढ़ावा देने वाला हो, वह स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश को जाति, धर्म और वर्गों में बांटने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की एकता और सामाजिक समरसता सर्वोपरि है।

उल्लेखनीय है कि यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की गई थीं। हालांकि, कुछ वर्गों ने इन नियमों का विरोध करते हुए आशंका जताई कि इससे सामान्य वर्ग के शिक्षकों और छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और झूठी शिकायतों के दुरुपयोग की संभावना भी बढ़ सकती है।

नियमों को लेकर देशभर में हुए विरोध के बाद सरकार ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने का निर्णय लिया। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2026 को इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये नियम अत्यधिक व्यापक, अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाले प्रतीत होते हैं।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को भविष्य में कोई भी नियम सभी पक्षों से व्यापक चर्चा और पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि भेदभाव किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से सामाजिक एकता और समरसता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

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