रायबरेली,28जनवरी(वार्ता) उत्तर प्रदेश के रायबरेली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 'यूजीसी' के नए नियमों के विरोध में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया, न्यायिक कार्य से विरत रहे और पैदल मार्च कर अपना विरोध दर्ज कराया साथ ही जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।
रायबरेली कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन की ओर से प्रस्ताव पारित कर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और पैदल मार्च निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ रायबरेली में विरोध जारी रहा। रायबरेली के कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के बैनर तले तमाम अधिवक्ताओं ने कार्य का बहिष्कार करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर से तहसील परिसर तक पैदल मार्च कर अपना आक्रोश जताया।
प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से इन काले नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यूजीसी द्वारा लाया गया यह काला कानून समाज को बांटने वाला है और शिक्षा प्रणाली पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता एक जागरूक प्राणी है, जो समय-समय पर गलत नीतियों का विरोध करता आया है और आगे भी करता रहेगा।
सुशील कुमार श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद देशभर में विरोध की स्थिति बनी हुई है। कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है यह काला कानून समाज को बांटने वाला है जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेगी तब तक जागरूक अधिवक्ता समाज शांतिपूर्ण ढंग से बैठने वाला नही है।
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