नोएडा/लखनऊ , जनवरी 28 -- राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ भाजपा नेता कलराज मिश्रा ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए नियमों को लेकर कड़ा विरोध जताया है। कलराज मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह नियम समाज को बांटने वाला है और इससे शिक्षा जगत में असंतोष फैलेगा।

नोएडा में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम संविधान की मूल भावना का हनन करते हैं और यह एक जाति आधारित, एकतरफा कानून है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कलराज मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह नियम समाज को बांटने वाला है और इससे शिक्षा जगत में असंतोष फैलेगा। उन्होंने मांग की कि या तो इन नियमों में व्यापक बदलाव किए जाएं या फिर इन्हें तत्काल प्रभाव से पूरी तरह वापस लिया जाए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह नियमों में स्पष्ट नहीं है। बिना जवाबदेही तय किए इस तरह का प्रावधान करना गंभीर चिंता का विषय है।

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि शिकायत निवारण समिति में सभी वर्गों का समान और संतुलित प्रतिनिधित्व होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश न रहे और न्याय सुनिश्चित हो सके।

कलराज मिश्रा ने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक या सामाजिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए। नियम ऐसे हों जो सभी के लिए समान हों और संविधान के अनुरूप हों।

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