जयपुर , दिसम्बर 29 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान बताते हुए कहा है कि संगठन के अनुशासन और कर्तव्यपरायणता से एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की नींव साबित हो रहा है।

श्री शर्मा सोमवार को जयपुर में एबीवीपी के 61वें प्रांत अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देशहित में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एबीवीपी में जो राष्ट्रनिर्माण की भावना जन्म लेती है वही आगे चलकर धरातल पर साकार होती है। विद्यार्थी परिषद से निकले अनेक कार्यकर्ता आज उच्च पदों पर स्थापित हैं। उन्होंने कहा इस अधिवेशन में 23 जिलों से 700 से अधिक कर्मयोगी विद्यार्थी एकत्रित हुए हैं और एक हजार से अधिक शिक्षाविद् एवं विद्यार्थी इस आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी परिषद पिछले सात दशकों से भी अधिक समय से भारत की अखंडता एवं गरिमा के संरक्षण में अतुलनीय योगदान दे रही है। जब भी भारतीयता और राष्ट्रभक्ति के बारे में किसी युवा संगठन की बात आती है तो एबीवीपी का नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी देश को एक नयी दिशा देने वाले अनेक आंदोलनों की सूत्रधार रही है। 1970 में बंगलादेशी घुसपैठियों के देश में उत्पात के खिलाफ मुहिम, विश्वविद्यालयों में स्वस्थ वातावरण का निर्माण ऐसे आंदोलनों में शामिल हैं।

एबीवीपी के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री देवदत्त जोशी ने कहा कि एबीवीपी केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देने वाला एक वैचारिक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि आज परिषद से 76 लाख से अधिक छात्र जुड़े हुए हैं और आने वाले समय में यह संख्या एक करोड़ तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि परिषद विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि विद्यार्थी परिषद संगठन की कार्यपद्धति, अनुशासन छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति के नारे को चरितार्थ करती है। उन्होंने कहा कि छात्र शक्ति को केवल कैंपस तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को भारत की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास से जुड़ने की प्रेरणा दी।

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