शिमला , फरवरी 28 -- दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हुए युवा कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी नेताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय केंद्रीय जांच की मांग करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय की कथित भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को ठेस पहुंची। उन्होंने दावा किया कि भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर अर्धनग्न प्रदर्शन किया, जिसे उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना और भारत की वैश्विक छवि के लिए हानिकारक बताया।

श्री शर्मा ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत सरकार द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उनके अनुसार यह आयोजन उभरती प्रौद्योगिकियों और नीतिगत संवाद पर भारत की नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच था।

उन्होंने कहा, "यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वैश्विक स्तर का आयोजन था। ऐसे मंच पर किसी भी तरह का व्यवधान देश की साख को प्रभावित करता है।"भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पूरे घटनाक्रम के "मैनेजर" थे और मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में कथित रूप से शामिल कुछ व्यक्तियों को दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में ठहराया गया था और कमरों की बुकिंग राज्य सरकार से जुड़े आधिकारिक माध्यमों से की गई थी। उनके अनुसार, यह पहलू स्वतंत्र जांच की मांग करता है।

श्री शर्मा ने आगे कहा कि दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कुछ आरोपियों को हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली पुलिस अदालत से स्वीकृत ट्रांजिट रिमांड आदेश के साथ आरोपियों को वापस ले जाने पहुंची, तो हिमाचल पुलिस ने प्रक्रिया में बाधा डाली और दिल्ली पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया।

उन्होंने इसे दो राज्यों की पुलिस के बीच असामान्य टकराव बताते हुए कहा कि घटनाक्रम ने गंभीर संवैधानिक और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

भाजपा नेता ने इस विवाद को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के हालिया बजट सत्र की कार्यवाही से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लिया जाता है, लेकिन सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से संबंधित प्रस्ताव को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, आरडीजी प्रस्ताव पर तीन दिन चर्चा के बाद 18 फरवरी को इसे पारित किया गया और सदन स्थगित कर दिया गया।

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