शिमला , फरवरी 26 -- हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को भारतीय युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की ट्रांजिट रिमांड की अनुमति दे दी है। यह आदेश चिरगांव के एक रिसॉर्ट में बुधवार तड़के हुई नाटकीय छापेमारी और उसके बाद पैदा हुए अंतरराज्यीय पुलिस विवाद के उपरांत आया है।

अदालत की कार्यवाही के दौरान दिल्ली पुलिस की विशेष अपराध शाखा के 20 सदस्य और युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए। यह पेशी हिमाचल प्रदेश पुलिस की दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में हुई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यकर्ताओं सिद्धार्थ, सौरभ और अरबाज को दिल्ली ले जाने की इजाजत दे दी। इन पर दिल्ली में हुए एआई शिखर सम्मेलन 2026 में विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप है।

इस विवाद की शुरुआत बुधवार सुबह करीब पांच बजे हुई थी। चिरगांव स्थित चांशल रिसॉर्ट के प्रबंधन ने शिकायत की थी कि सादे कपड़ों में आये 12 से 15 अज्ञात लोग वहां ठहरे तीन मेहमानों को जबरन ले जाने लगे। शिकायत में यह भी कहा गया कि वे लोग मेहमानों की गाड़ी और सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी बिना किसी आधिकारिक नोटिस या रसीद के साथ ले गये। इसी आधार पर हिमाचल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने शोघी और धर्मपुर में नाकाबंदी कर दिल्ली पुलिस की टीम और तीनों कार्यकर्ताओं को रोका और उन्हें शिमला लाकर अदालत में पेश किया। अदालत में दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानूनी रूप से सही बताते हुए जब्ती मेमो और अन्य दस्तावेज पेश किये। उन्होंने बताया कि ये कार्यकर्ता दिल्ली में दर्ज एक मामले में वांछित हैं और उनके पास संबंधित वारंट उपलब्ध हैं।

दूसरी ओर, चिरगांव रिसॉर्ट की घटना को लेकर दिल्ली पुलिस की टीम के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार शिमला पुलिस अब दिल्ली पुलिस के पेश दस्तावेजों और प्रक्रिया पालन की गहन समीक्षा करेगी। अगर सब सही रहा, तो पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है, अन्यथाइस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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