पटियाला , अप्रैल 01 -- दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने बुधवार को युवाओं से आगे आने और गुरु रविदास जी के बताये जातिविहीन और भेदभाव मुक्त राष्ट्र 'बेगमपुरा' की अवधारणा पर आधारित समाज बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि समानता की संवैधानिक गारंटी के बावजूद सामाजिक और आर्थिक असमानताएं बनी हुई हैं, इसलिए संवैधानिक मूल्यों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।

पंजाब सरकार ने श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की, जिसका पहला कार्यक्रम यहां पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और एक समतावादी समाज के उनके दृष्टिकोण पर केंद्रित था।

असमानता पर प्रकाश डालते हुए श्री सिसोदिया ने बताया कि आबादी का एक छोटा प्रतिशत धन के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है, जो समावेशी विकास के बारे में चिंता पैदा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं युवाओं को असमानता और सामाजिक न्याय के मुद्दों से जोड़ने में मदद करेंगी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार गुरु रविदास जी के समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि खुरालगढ़ में श्री गुरु रविदास स्मारक के विकास कार्य चल रहे हैं और जल्द ही फरीदपुर में श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

श्री चीमा ने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य एक आध्यात्मिक वातावरण बनाना और छात्रों को गुरु रविदास जी की सुधारवादी शिक्षाओं से जोड़ना है। उन्होंने पंजाबी विश्वविद्यालय को राज्य सरकार की वित्तीय सहायता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इसके बजट में काफी वृद्धि की गई है, जिससे इसे वित्तीय चुनौतियों से उबरने में मदद मिली है।

कार्यक्रम के दौरान धार्मिक विद्वानों और शिक्षाविदों ने गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की। डेरा संत प्रीतम दास की दीदी संतोष ने अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ गुरु जी के संदेश पर जोर दिया, जबकि प्रो. मंजिंदर सिंह ने उनकी बाणी के दार्शनिक और सामाजिक आयामों के बारे में विस्तार से बताया।

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