लखनऊ/ग्रेटर नोएडा , फरवरी 19 -- उत्तर प्रदेश को डिजिटल और औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और बड़ा निवेश प्रस्ताव सामने आया है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन लगभग 400 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करेगा। गुरुवार को यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने कंपनी को पांच एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार भाटिया भी उपस्थित रहे। यह परियोजना उत्तर भारत की डिजिटल अवसंरचना को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) के पूर्व छात्र करण गुप्ता के नेतृत्व में विकसित की जा रही इस परियोजना के तहत यीडा सेक्टर में पांच एकड़ के भूखंड पर दो आधुनिक डेटा सेंटर भवन बनाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 7000 सर्वर रैक की होगी।

परियोजना में दो चरणों में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और पूर्ण संचालन के बाद लगभग 100 योग्य पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। भूमि हस्तांतरण के 18 माह के भीतर व्यावसायिक संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। यह डेटा सेंटर उच्च घनत्व डिजिटल संचालन और तेजी से बढ़ते एआई सेगमेंट को विशेष समर्थन प्रदान करेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता और विकसित फाइबर नेटवर्क से परियोजना को कनेक्टिविटी और अवसंरचना का लाभ मिलेगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत कूलिंग तकनीक और ऊर्जा-कुशल पावर सिस्टम के उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर जोर दिया जाएगा।

इसी क्रम में इटली आधारित वैश्विक कंपनी सिंप्लास्ट ग्रुप ने भी यीडा क्षेत्र में 70 करोड़ रुपये के निवेश से ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उन्नत प्लास्टिक एवं रोटेशनल मोल्डिंग उत्पादों की नई विनिर्माण इकाई स्थापित करने की घोषणा की है, जिसमें 50 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश शामिल है। कंपनी को तीन एकड़ भूमि आवंटन हेतु एलओआई पत्र प्रदान किया गया। इस परियोजना से प्रदेश में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा तथा कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही लॉजिस्टिक्स, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होगा।

उन्नत यूरोपीय तकनीक के हस्तांतरण, आधुनिक उत्पादन प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी तथा एमएसएमई और सप्लाई चेन नेटवर्क को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल 'मेक इन इंडिया' के अनुरूप उत्तर प्रदेश को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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