यवतमाल , फरवरी 04 -- महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में इस साल जनवरी के महीने में ही कम से कम 22 किसानों के आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। किसान के मुद्दों पर दशकों से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता किशोर तिवारी ने बुधवार को जिला प्रशासन के आंकड़ों के हवाले से एक बयान जारी कर यह दावा किया है।
विदर्भ क्षेत्र में तीन दशकों से कृषि संकट पर काम कर रहे श्री तिवारी ने बताया कि ये मौतें क्षेत्र के विभिन्न तालुकों जैसे घाटंजी, आर्णी, केलापुर, झरी, महागांव, दारव्हा, उमरखेड़, बाभुलगांव, दिग्रस, नेर, कलंब और रालेगांव में हुई हैं। ये मौतें इस क्षेत्र में जारी गंभीर संकट को दर्शाती हैं।
कार्यकर्ता ने यह भी दावा किया कि इनके अलावा पट्टे पर भूमि लेकर खेती करने वाले 10 बटाईदार किसानों ने भी आत्महत्या की है। इन मामलों को आधिकारिक तौर पर 'किसान आत्महत्या' के रूप में दर्ज नहीं किया जाता है क्योंकि मृतकों के पास भूमि स्वामित्व के दस्तावेज नहीं होते हैं, जिसके कारण उनके परिवार सरकारी मुआवजे के पात्र नहीं बन पाते हैं। पश्चिमी विदर्भ के जिलों यवतमाल, अमरावती, अकोला, वाशिम और बुलढाणा में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में अकेले यवतमाल में 446 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद अमरावती (396) और अकोला (388) का स्थान रहा था।
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