भोपाल , जनवरी 12 -- राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में राज्य स्तरीय सामूहिक सूर्य नमस्कार एवं प्राणायाम कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से राष्ट्र के युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया। वे महान राष्ट्रचिंतक थे और कर्म से भी युवा थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग हमारी भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। सूर्य नमस्कार केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को सामान्यता से उत्कृष्टता की ओर ले जाने का सशक्त माध्यम है। सूर्य नमस्कार की 12 योग क्रियाओं से शरीर निरोगी और मन सशक्त बनता है। उन्होंने योगाचार्यों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के साथ सूर्य नमस्कार के तीन चक्र एवं विभिन्न प्राणायाम क्रियाएं भी कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्य नारायण के प्रकाश से ही जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है। भारतीय संस्कृति में दीप प्रज्ज्वलन सूर्य उपासना का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्वयं को तैयार करें, नवाचार को अपनाएं और अपनी समृद्ध संस्कृति व विरासत का संरक्षण करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से नशे की लत और जंक फूड से दूरी बनाने, प्रतिदिन व्यायाम करने, खेलकूद अपनाने और अपने व्यक्तित्व के साथ चरित्र निर्माण पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित है और हमें मानवता व समाज के लिए जीना चाहिए।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के साथ हुई। स्वामी विवेकानंद के शिकागो विश्व धर्म संसद के ऐतिहासिक संबोधन का प्रसारण किया गया। एक संकेत पर प्रदेशभर में एक साथ सामूहिक सूर्य नमस्कार एवं प्राणायाम किया गया, जिसका आकाशवाणी के माध्यम से सीधा प्रसारण हुआ। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, भोपाल महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी सहित जनप्रतिनिधि, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर पालिटेक्निक चौराहे पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि भी अर्पित की और कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई, जिसके लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।

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