आइजोल , दिसंबर 28 -- म्यांमार के चिन राज्य में हाल के दिनों में हुई हिंसा की घटनाओं के कारण कम से कम 89 चिन निवासी मिजोरम में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं, जिनमें सैन्य जुंटा द्वारा प्रस्तावित दो चरणों के चुनाव से पहले फलाम टाउनशिप में तीव्र सैन्य अभियानों से बचकर भागे हुए नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों एवं ग्रामीण नेताओं ने कहा कि पहला समूह, फलाम के 'के' हैमुअल गांव और आसपास के गांवों से आए 11 परिवारों के 47 लोगों ने 28 नवंबर से साइखुमफाई गांव के पास तियाऊ नदी को पार किया। उन्हें बाद में दो दिसंबर को पड़ोसी वफाई गांव में स्थानांतरित किया गया और वर्तमान में वे गांव के सामुदायिक भवन में शरण लिए हुए हैं।

फलाम टाउनशिप के ह्रुम्हरंग गांव से 42 शरणार्थियों का दूसरा जत्था वाफाई पहुंचा, जहां उन्हें अस्थायी रूप से फियारातुई मिडिल स्कूल की इमारत में शरण दिया गया है। स्थानीय नेताओं ने कहा कि सात जनवरी को स्कूल खुलने के बाद इस समूह को दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा।

शरणार्थियों ने कहा कि उनके गांवों पर जेट लड़ाकू विमानों, जायरोकॉप्टरों एवं ड्रोनों द्वारा समन्वित हमले किए गए, जिसके बाद जमीनी सैनिकों ने बस्तियों में प्रवेश किया, संपत्ति लूटी, पालतू जानवरों की हत्या की और घरों में आग लगा दी।

एक शरणार्थी खाम लियान थांग ने कहा, "हमें नहीं पता कि हमारे सामान का क्या हुआ। सभी अपनी जान बचाने के लिए जंगल की ओर भागे और वहां से हम मिजोरम पहुंचे।"थांग ने आगे कहा कि जब सैन्य बलों ने फलाम शहर पर हमला किया था, तब उन्होंने एक वित्तीय संस्थान में अपनी नौकरी एवं अपना पैतृक घर खो दिया, जिसके कारण उन्हें अपनी सास के पैतृक गांव 'के' हैमुअल भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

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