मुंबई , फरवरी 03 -- रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक बुधवार से शुरू हो रही है। बैठक में रेपो दर को यथावत रखने की उम्मीद है।
रेपो दर वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। इसमें कटौती बैंक ऋण सस्ता होता है और साथ ही बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज में भी कमी करते हैं।
तीन दिन तक चलने वाली बैठक के बाद 06 फरवरी को समिति के फैसले की घोषणा की जायेगी। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गयी थी। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल चार बार में रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती थी। फरवरी 2025 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत और जून में 0.50 प्रतिशत की कटौती की थी। अगस्त और अक्टूबर में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया जबकि दिसंबर में रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटायी गयी थी।
आगे और कटौती करने से पहले केंद्रीय बैंक इंतजार करने की नीति अपना सकता है। दिसंबर की बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने अपने रुख को तटस्थ बनाये रखा था। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि जनवरी-मार्च तिमाही में मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए एमपीसी मुद्रास्फीति के जनवरी और फरवरी के आंकड़ों का पहले दरों को यथावत रखने का फैसला कर सकता है।
पिछली बैठक के बाद से दो महीने में भू-राजनैतिक परिस्थितियों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। इस बीच दो बड़े समझौतों की घोषणा जरूर हुई है। जनवरी के अंत में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार संधि पर वार्ता सफलतापूर्वक समाप्त होने की घोषणा की गयी और उसके बाद सोमवार देर रात अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर सहमति बन जाने की घोषणा की गयी। दोनों मामलों में समझौतों की शर्तों और विस्तृत विवरण सामने आने में समय लगेगा।
यह देखते हुए कि अब उद्योगों पर पहले की तरह दबाव नहीं है और सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है केंद्रीय बैंक के रेपो दर स्थिर रखने की संभावना है।
पिछले दो महीने में केंद्रीय बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद के जरिये बैंकिंग तंत्र में चार लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराई है। इससे भी रेपो दर कम करने का दबाव कम हुआ है।
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