जालंधर , दिसंबर 28 -- पंजाब में जालंधर रेलवे स्टेशन के सामने रविवार को आयोजित "जनतक संगठनों का संयुक्त मंच' (जेपीएमओ) के राज्य स्तरीय महाधिवेशन में केंद्र सरकार द्वारा जनता के अधिकारों पर किए जा रहे हमलों और इस सरकार की जनविरोधी, देशविरोधी नीतियों के खिलाफ चरणबद्ध महासंघर्ष शुरू करने का ऐलान किया गया ।

मंच के अध्यक्ष जगदीश चंद्र ने रविवार को यहां जारी बयान में कहा कि मुख्य प्रस्ताव में मांग की गई कि 12 करोड़ से ज्यादा भूमिहीन और साधनहीन ग्रामीण मजदूर परिवारों को गारंटीड रोजगार से वंचित करने के लिए साजिश के तहत पारित 'वीबीजी रामजी' एक्ट को अविलंब रद्द किया जाए और मनरेगा एक्ट को अविलंब बहाल किया जाए और सभी वयस्क मजदूरों को साल भर काम दिया जाए। मज़दूरों को देसी-विदेशी कॉर्पोरेट्स का गुलाम बनाने के लिए बनाए गए चार लेबर कोड तुरंत रद्द किए जाएं और मज़दूरों के संघर्षों की वजह से बनाए गए 44 लेबर कानूनों को फिर से लागू किया जाए। बिजली संशोधन बिल-2025 और प्रस्तावित सीड अमेंडमेंट बिल को हमेशा के लिए खारिज किया जाए।

यह भी तय किया गया है कि 16 जनवरी को एसकेएम , 'सेंट्रल और स्टेट ट्रेड यूनियन्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन्स', 'जॉइंट लेबर फ्रंट' और दूसरे संगठन के ज़िला लेवल पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में पूरी ताकत से शामिल होंगे और फरवरी में होने वाली मज़दूरों की हड़ताल को कामयाब बनाने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर देंगे।

जगदीश चंद्र ने कहा कि मंच की मांगों को पूरा करने के लिए, 15 जनवरी तक गांवों और शहरों में एक बड़ा पब्लिक मूवमेंट शुरू करने की योजना बनाई गई है ताकि केंद्र और राज्य सरकारों की उन नव उदारवादी नीतियों के खिलाफ़ लोगों को जागरूक किया जा सके जो देश के हितों और लोगों की बुनियादी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करती हैं ।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित