जोधपुर , फरवरी 04 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने केंद्रीय बजट-2026 को केवल सरकार के आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की ठोस कार्ययोजना बताते हुए कहा है कि आज का भारत उस दौर में खड़ा है जहां बजट लोकलुभावन घोषणाओं का माध्यम नहीं बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण का औजार बन चुका है।
श्री शेखावत बुधवार को यहां बजट युवा सम्मेलन में युवाओं से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे एक परिवार अपनी आय और खर्च का संतुलन बनाता है, वैसे ही सरकार का बजट देश की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। आज की पीढ़ी सौभाग्यशाली है, क्योंकि वह उस भारत को प्रत्यक्ष देख रही है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास, तीनों स्तरों पर तेजी से बदल रहा है। उन्होंने बताया कि बजट निर्माण से पहले देशभर के हजारों युवाओं से विचार-विमर्श किया गया। युवाओं के सुझावों, उनकी शब्दावली और दृष्टिकोण ने सरकार को दिशा दी। यह पहली बार है, जब बजट केवल संसद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं के साथ साझा विमर्श का विषय बना।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले बजट का उपयोग अक्सर चुनावी साधन के रूप में होता था। बड़ी घोषणाएं होती थीं, लेकिन जमीनी असर सीमित रहता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सोच बदली। अब प्राथमिकता 'कहने' की नहीं, 'करके दिखाने' की है। नोटबंदी का उदाहरण देते हुए श्री शेखावत ने कहा कि कठिन निर्णय लेने का साहस तभी संभव है, जब राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। उन्होंने कहा कि देश में पिछले 11 वर्षों में सड़कों, रेल नेटवर्क, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक्स में अभूतपूर्व निवेश हुआ है। रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार और हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि इसका प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दस वर्षों में यह परिवर्तन कई गुना तेज होगा।
अर्थव्यवस्था के आकार पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब अर्थव्यवस्था बढ़ती है तो सरकार के संसाधन बढ़ते हैं। टैक्स संग्रह में वृद्धि से सरकार निवेश करती है, जिससे उद्योग, रोजगार और आम आदमी की आय बढ़ती है। जीएसटी सुधारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि टैक्स दरें घटने के बावजूद संग्रह दोगुना हुआ, क्योंकि बचत फिर से खर्च और निवेश में बदली। श्री शेखावत ने कहा कि स्टार्टअप, स्टैंड-अप इंडिया, मुद्रा और जेएएम जैसी योजनाओं को कभी हल्के में लिया गया, लेकिन आज उनके परिणाम सामने हैं। देश में स्टार्टअप्स की संख्या दो लाख के करीब पहुंच चुकी है और भारत वैश्विक यूनिकॉर्न हब बन चुका है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सरकारी नौकरी एक विकल्प है, लेकिन अंतिम लक्ष्य उद्यमिता और नवाचार होना चाहिए।
बजट में शिक्षा, एसटीईएम और बेटियों के सशक्तीकरण पर विशेष जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हर जिले में पूर्ण सुविधाओं वाला गर्ल्स हॉस्टल बनेगा। डिजिटल शिक्षा, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और ऑनलाइन लर्निंग से शहरी-ग्रामीण शिक्षा अंतर कम किया जा रहा है। कोविड काल की चर्चा करते हुएश्री शेखावत ने कहा कि भारत ने संकट को अवसर में बदला। न केवल गरीबों को सहायता दी गई बल्कि बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश कर अर्थव्यवस्था को संभाला गया। परिणामस्वरूप भारत न केवल प्री-कोविड स्तर पर लौटा, बल्कि उससे आगे निकल गया।
दावोस का उल्लेख करते हुए श्री शेखावत ने कहा कि आज भारत वैश्विक आर्थिक विमर्श के केंद्र में है। यूरोपीय संघ के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता 'मदर ऑफ डील्स' है, जिसने भारतीय उद्योगों और युवाओं के लिए विशाल अवसर खोले हैं। मोबिलिटी समझौते से यूरोप में भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल श्रम-आधारित उद्योगों तक सीमित नहीं है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन, तेजस विमान, स्पेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और 6जी, ये सभी भारत की बदलती औद्योगिक पहचान के प्रतीक हैं।
श्री शेखावत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर लड़ने से नहीं होता। ईमानदारी से कर देना, उद्यम शुरू करना, तकनीक अपनाना और संस्कृति पर गर्व करना भी राष्ट्र निर्माण है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस परिवर्तनशील भारत के केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागी बने।
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