, Oct. 31 -- श्री मोदी ने भारत की एकता के चार आधारभूत स्तंभों को इस अवसर पर रेखांकित किया और कहा कि इनमें प्रथम सांस्कृतिक एकता है। भारत की संस्कृति ने हज़ारों वर्षों से राष्ट्र को राजनीतिक परिस्थितियों से स्वतंत्र, एक एकीकृत इकाई के रूप में जीवित रखा है। उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों, सात पवित्र नगरों, चार धामों, 50 से ज़्यादा शक्तिपीठों और तीर्थयात्राओं की परंपरा को वह प्राण ऊर्जा बताया, जो भारत को एक जागरूक और जीवंत राष्ट्र बनाती है।
उन्होंने कहा कि सौराष्ट्र तमिल संगमम और काशी तमिल संगमम जैसे आयोजनों के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से, भारत के गहन योग विज्ञान को नयी वैश्विक मान्यता मिल रही है और योग लोगों को जोड़ने का एक माध्यम बन रहा है।
श्री मोदी ने भारत की एकता के दूसरे स्तंभ-भाषाई एकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सैकड़ों भाषायें और बोलियां राष्ट्र की खुली और रचनात्मक मानसिकता का प्रतिबिंब हैं। भारत में किसी भी समुदाय, सत्ता या संप्रदाय ने कभी भी भाषा को हथियार नहीं बनाया है या किसी एक भाषा को दूसरी भाषा पर थोपने का प्रयास नहीं किया है। यही कारण है कि भारत भाषाई विविधता के मामले में सबसे समृद्ध देशों में से एक बन गया है। उन्होंने भारत की भाषाओं की तुलना संगीत के सुरों से की जो देश की पहचान को मज़बूत करते हैं। उन्होंने कहा कि हर भाषा को एक राष्ट्रीय भाषा माना जाता है और भारत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक तमिल और ज्ञान का भंडार संस्कृत का घर है।
उन्होंने प्रत्येक भारतीय भाषा की अद्वितीय साहित्यिक और सांस्कृतिक संपदा को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार उन सभी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए कि भारत के बच्चे अपनी मातृभाषा में अध्ययन करें और प्रगति करें तथा नागरिक अन्य भारतीय भाषाओं को सीखें और उनका सम्मान करें। भाषाओं को एकता का सूत्र बनना चाहिए और यह एक दिन का काम नहीं बल्कि एक सतत प्रयास है जिसके लिए सामूहिक ज़िम्मेदारी की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने भारत की एकता के तीसरे स्तंभ को भेदभाव मुक्त विकास बताया और कहा कि गरीबी और असमानता सामाजिक ताने-बाने की सबसे बड़ी कमज़ोरियां हैं, जिनका अक्सर देश के विरोधियों द्वारा लाभ उठाया गया है। सरदार पटेल गरीबी से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक योजना बनाने के इच्छुक थे। सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर भारत को 1947 से 10 वर्ष पहले आज़ादी मिल जाती, तो देश उस समय तक खाद्यान्न संकट से उबर चुका होता। सरदार पटेल का मानना था कि जिस तरह उन्होंने रियासतों के एकीकरण की चुनौती का समाधान किया, उसी तरह वे खाद्यान्न संकट से भी उतनी ही दृढ़ता से निपटते। उनका दृढ़ संकल्प ऐसा ही था और आज बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी यही भावना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार सरदार पटेल की अधूरी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए काम कर रही है। पिछले एक दशक में 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। लाखों गरीब परिवारों को घर मिल रहे हैं, हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना राष्ट्र का मिशन और विज़न दोनों है। भेदभाव और भ्रष्टाचार से मुक्त ये नीतियां राष्ट्रीय एकता को मज़बूत कर रही हैं।
श्री मोदी ने राष्ट्रीय एकता के चौथे स्तंभ-कनेक्टिविटी के माध्यम से दिलों को जोड़ने-को रेखांकित करते हुए कहा कि देश भर में रिकॉर्ड संख्या में राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे बनाये जा रहे हैं। वंदे भारत और नमो भारत जैसी रेल भारतीय रेलवे में बदलाव ला रही हैं। छोटे शहर भी अब हवाई अड्डे की सुविधाओं तक पहुंच बना रहे हैं। इस आधुनिक बुनियादी ढांचे ने न केवल भारत के बारे में दुनिया की धारणा बदल दी है, बल्कि उत्तर और दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के बीच की दूरियां भी कम कर दी हैं। लोग अब पर्यटन और व्यापार के लिए आसानी से राज्यों के बीच यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोगों के बीच जुड़ाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक नये युग का प्रतीक है, जो राष्ट्रीय एकता को मज़बूत कर रहा है। डिजिटल कनेक्टिविटी भी लोगों के बीच जुड़ाव को और मज़बूत कर रही है।
श्री मोदी ने सरदार पटेल के शब्दों का स्मरण करते हुए कहा कि उन्हें सबसे अधिक आनंद राष्ट्र की सेवा करने में मिलता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से इसी भावना को अपनाने का आग्रह किया और कहा कि देश के लिए काम करने से बड़ा कोई सुख नहीं है और मां भारती के प्रति समर्पण प्रत्येक भारतीय के लिए सर्वोच्च आराधना है। जब 140 करोड़ भारतीय एक साथ खड़े होते हैं, तो पहाड़ भी मार्ग दे देते हैं और जब वे एक स्वर में बोलते हैं, तो उनके शब्द भारत की सफलता का उद्घोष बन जाते हैं। उन्होंने राष्ट्र से एकता को एक दृढ़ संकल्प के रूप में अपनाने, अविभाजित और अडिग रहने का आह्वान किया और कहा कि यही सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि है।"उन्होंने कहा कि राष्ट्र एकजुट होकर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को मजबूत करेगा और एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेगा।
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