मेरठ , फरवरी 20 -- वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच मेरठ एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निर्णायक संदेश देने के मंच के रूप में देख रही है।
दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो के उद्घाटन के बाद मुहिउद्दीनपुर में होने वाला यह कार्यक्रम महज़ औपचारिकता नहीं बल्कि जाट बहुल क्षेत्र समेत व्यापक मतदाता वर्ग तक सीधा राजनीतिक संकेत पहुंचाने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पार्टी इस आयोजन को शक्ति-प्रदर्शन में बदलने की तैयारी में है। विकास, राष्ट्रवाद और संगठनात्मक मजबूती, इन्हीं तीन आधारों पर चुनावी कथा बुनी जा रही है ताकि मेरठ से उठी आवाज पूरे प्रदेश में गूंज सके। मेट्रो और नमो भारत परियोजनाओं को 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्हें सुशासन और तेज़ रफ्तार विकास का प्रतीक बताया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र में संभावित उछाल को भी इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया गया है, जिससे सामाजिक समीकरणों के बीच विकास का सूत्र प्रमुखता से स्थापित किया जा सके।
रैली को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए एक लाख से अधिक लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। बूथ और सेक्टर स्तर पर बैठकों का सिलसिला जारी है, जबकि प्रदेश संगठन महामंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक वर्चुअल माध्यम से तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं, ताकि कोई चूक न रह जाए।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रमुख चुनाव अभियानों की शुरुआत अक्सर मेरठ से ही की है। 5 फरवरी 2014 की 'शंखनाद रैली' से शुरू हुआ यह सिलसिला 2019 और 2024 में भी दोहराया गया। ऐसे में 22 फरवरी की रैली को उसी राजनीतिक परंपरा की अगली कड़ी माना जा रहा है, जहाँ विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ चुनावी संदेश भी मंच से सशक्त रूप में प्रसारित किया जाएगा।
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