बिलासपुर, अप्रैल 10 -- मोटर दुर्घटना दावा मामलों में उच्च न्यायालय ने पीड़ित परिवारों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गुरुवार को हुई इस सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन में देरी होने के आधार पर क्लेम को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता, उक्त जानकारी आज अदालत ने दी ।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि पीड़ितों को सिर्फ तकनीकी कारणों के चलते न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले से प्रदेश के उन सैकड़ों परिवारों को राहत मिली है, जो किसी कारणवश तय समय सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत नहीं कर सके थे।
दरअसल, बजाज आलियांज, टाटा एआईजी, ओरिएंटल, मैग्मा एचडीआई और इफको टोक्यो जैसी बीमा कंपनियों के साथ कुछ वाहन मालिकों ने 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं दायर की थीं। इनमें तर्क दिया गया था कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166(3) के तहत समय सीमा समाप्त होने के बाद ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं है।
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