लखनऊ , मार्च 6 -- उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मैनपुरी और इटावा जिलों में 'सारस सर्किट' विकसित कर रही है। इस पहल के तहत वेटलैंड क्षेत्रों का संरक्षण करते हुए पर्यटन सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

वन विभाग के माध्यम से इस परियोजना को विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज और समन के साथ इटावा के सरसई नावर तथा परौली रामायण वेटलैंड क्षेत्र को जोड़कर सारस सर्किट तैयार किया जाएगा।

सारस सर्किट के तहत इन वेटलैंड क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें प्रवेश द्वार, व्यू प्वाइंट, डेक और बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर साइट लाइटिंग और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी।

इसके अलावा सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क तथा ओडीओपी और स्मृति चिन्ह की दुकानें भी स्थापित की जाएंगी।

इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटक सारस के प्राकृतिक आवास को करीब से देख सकेंगे और वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का अवसर मिलेगा।

दुनिया के सबसे लंबे उड़ान भरने वाले पक्षियों में शामिल सारस क्रेन का प्रमुख आवास उत्तर प्रदेश के मैनपुरी, इटावा, एटा और अलीगढ़ के वेटलैंड क्षेत्र हैं।

सरकार का मानना है कि सारस सर्किट के विकास से इन वेटलैंड्स का संरक्षण मजबूत होगा और अन्य पक्षियों जैसे ग्रे हेरॉन और ओपन-बिल्ड स्टॉर्क के लिए भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध होगा।

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