लखनऊ , मई 05 -- उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से 'स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम' की शुरुआत मेरठ से हो गई है। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का भव्य समापन दिसंबर में गोरखपुर में किया जाएगा, जहां हजारों पशुपालक, दुग्ध उत्पादक, उद्यमी और निवेशक जुटेंगे।
अपर मुख्य सचिव (पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास) मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मंडल स्तर पर डेयरी कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं।
मेरठ में मंगलवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 'स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य-खुशहाल उत्तर प्रदेश' थीम के तहत किसान, पशुपालक और निवेशक एक मंच पर आए।
कार्यक्रम में निजी और सहकारी डेयरी कंपनियों-भारत स्किर, मधुसूदन, आनन्दा, मदर डेयरी, हरित प्रदेश, केएसएस डेयरी, अरविंद डेयरी और पराग-ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य दुग्ध विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देना और निवेश को आकर्षित करना है। इसके तहत नंद बाबा दुग्ध मिशन और उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य और स्थायी आय मिल रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक दुग्ध विकास क्षेत्र में 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू साइन किए जा चुके हैं, जिनसे 77 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे।
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